श्री लिखमीदासजी शिक्षण संस्थान (रजि.)
संस्था के उद्देश्य (Objectives) श्री लिखमीदासजी शिक्षण संस्थान (रजि.) 1. समाज में शिक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार करना एवं सभी वर्गों को शिक्षा के प्रति जागरूक बनाना। 2. विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय, अध्ययन कक्ष, कोचिंग एवं मार्गदर्शन की उचित व्यवस्था करना। 3. आर्थिक रूप से कमजोर, जरूरतमंद एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, शैक्षणिक सामग्री एवं सहयोग प्रदान करना। 4. समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों एवं अनुशासन को बढ़ावा देना। 5. युवाओं को शिक्षा, रोजगार एवं करियर के प्रति मार्गदर्शन एवं प्रेरणा देना। 6. समाज में एकता, भाईचारा एवं सामाजिक समरसता को मजबूत करना। 7. समय-समय पर शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करना। 8. नशा मुक्ति, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता से संबंधित अभियान चलाना। 9. तकनीकी एवं आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देना, जिससे युवा समय के साथ आगे बढ़ सकें। 10. समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सकारात्मक एवं रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना।
अध्याय — चुनाव आयुक्त समिति के अधिकार, कर्तव्य एवं जिम्मेदारियाँ
1. चुनाव आयुक्त समिति का गठन
(क) संस्था की कार्यकारिणी समिति द्वारा दो सदस्यीय चुनाव आयुक्त समिति का गठन किया जाएगा।
(ख) चुनाव आयुक्त समिति के सदस्यों से उनकी व्यक्तिगत लिखित सहमति/स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
(ग) चुनाव आयुक्त समिति का गठन संभावित चुनाव तिथि से कम से कम 60 दिन पूर्व किया जाएगा, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष एवं व्यवस्थित रूप से सम्पन्न की जा सके।
(घ) चुनाव आयुक्त समिति का कार्यकाल 3 वर्ष का होगा। आवश्यकता होने पर कार्यकारिणी समिति संविधान एवं उपनियमों के अनुसार नई चुनाव आयुक्त समिति का गठन कर सकेगी।
2. मुख्य दायित्व
चुनाव आयुक्त समिति का मुख्य दायित्व संस्था की कार्यकारिणी समिति का चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण ढंग से करवाना होगा।
3. चुनाव कार्यक्रम
(क) कार्यकारिणी समिति चुनाव की तिथि एवं विस्तृत चुनाव कार्यक्रम निर्धारित करेगी।
(ख) कार्यकारिणी समिति चुनाव प्रारम्भ होने से पूर्व चुनाव में भाग लेने के लिए योग्य एवं अयोग्य सदस्यों की सूची चुनाव आयुक्त समिति को उपलब्ध कराएगी।
(ग) चुनाव कार्यक्रम प्रारम्भ होने के पश्चात नामांकन प्रक्रिया से लेकर चुनाव परिणाम घोषित होने तक की संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया का संचालन चुनाव आयुक्त समिति करेगी।
4. चुनाव प्रक्रिया पर अधिकार
चुनाव आयुक्त समिति को निम्नलिखित कार्य करने का अधिकार होगा—
1. चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन प्रक्रिया संचालित करना।
2. उम्मीदवारों के नामांकन पत्र प्राप्त करना।
3. नामांकन पत्रों की जांच करना।
4. योग्य एवं अयोग्य उम्मीदवारों की सूची घोषित करना।
5. आपत्तियों को प्राप्त कर उनका नियमानुसार निस्तारण करना।
6. उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी करना।
7. मतदान की व्यवस्था करना।
8. मतदाता सूची के अनुसार मतदान करवाना।
9. मतगणना करवाना।
10. चुनाव परिणाम घोषित करना।
11. चुनाव प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक अभिलेख सुरक्षित रखना।
12. चुनाव के दौरान अनुशासन एवं निष्पक्षता बनाए रखना।
5. चुनाव सहयोगी
(क) चुनाव आयुक्त समिति चुनाव प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए अधिकतम दो सहयोगियों की नियुक्ति कर सकेगी।
(ख) चुनाव आयुक्त समिति के सहयोगी संस्था की वर्तमान कार्यकारिणी के सदस्य नहीं होंगे।
(ग) सहयोगियों की भूमिका केवल चुनाव प्रक्रिया में चुनाव आयुक्त समिति को आवश्यक सहयोग प्रदान करने तक सीमित होगी।
(घ) सहयोगी चुनाव आयुक्त समिति के निर्देशों के अनुसार कार्य करेंगे तथा चुनाव की गोपनीयता एवं निष्पक्षता बनाए रखना उनका दायित्व होगा।
6. चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध
(क) चुनाव आयुक्त समिति के दोनों सदस्य तथा उनके द्वारा नियुक्त सहयोगीगण संस्था की कार्यकारिणी समिति अथवा किसी पद के लिए उम्मीदवार नहीं बन सकेंगे।
(ख) चुनाव आयुक्त समिति के सदस्य एवं उनके सहयोगी अपने पुत्र, पुत्री, भाई, बहन, पति/पत्नी अथवा ऐसे निकट संबंधी, जिनकी उम्मीदवारी से निष्पक्षता पर प्रत्यक्ष हित-संघर्ष उत्पन्न हो सकता हो, के चुनावी प्रबंधन में पक्षपात नहीं करेंगे।
(ग) चुनाव आयुक्त समिति के सदस्यों एवं उनके सहयोगियों को, यदि वे संस्था के वैध सदस्य एवं मतदाता हैं, तो अपने मताधिकार का पूर्ण प्रयोग करने का अधिकार होगा।
(घ) मतदान करते समय चुनाव आयुक्त समिति एवं सहयोगीगण अपने मत की गोपनीयता बनाए रखेंगे।
7. बराबर मत होने की स्थिति
(क) किसी पद के चुनाव में दो या अधिक उम्मीदवारों को समान मत प्राप्त होने की स्थिति में चुनाव आयुक्त समिति पहले संविधान/उपनियम में निर्धारित किसी अन्य वैध प्रक्रिया का पालन करेगी।
(ख) यदि ऐसी कोई प्रक्रिया निर्धारित न हो, तो बराबर मत प्राप्त उम्मीदवारों के मध्य पर्ची द्वारा निष्पक्ष चयन किया जा सकेगा।
(ग) पर्ची निकालने की प्रक्रिया सभी संबंधित उम्मीदवारों/उनके अधिकृत प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पारदर्शी ढंग से की जाएगी।
(घ) पर्ची द्वारा किया गया निर्णय चुनाव परिणाम के संबंध में अंतिम माना जाएगा, बशर्ते कि उसमें कोई स्पष्ट अनियमितता, धोखाधड़ी या संविधान/लागू कानून का उल्लंघन सिद्ध न हो।
8. चुनाव संबंधी विवाद एवं अपील
(क) चुनाव प्रक्रिया अथवा चुनाव परिणाम से संबंधित किसी भी आपत्ति/विवाद के लिए संबंधित प्रत्याशी को चुनाव परिणाम घोषित होने की तारीख से 5 दिवस के भीतर चुनाव आयुक्त समिति के समक्ष लिखित अपील प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
(ख) निर्धारित 5 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात प्रस्तुत की गई अपील सामान्यतः विचारणीय नहीं होगी, जब तक कि चुनाव आयुक्त समिति उचित एवं असाधारण कारणों से विलंब को स्वीकार न करे।
(ग) चुनाव आयुक्त समिति प्राप्त अपील की जांच कर अपना लिखित एवं कारणयुक्त निर्णय यथासंभव शीघ्र प्रदान करेगी।
(घ) चुनाव आयुक्त समिति के समक्ष उपलब्ध आंतरिक अपील प्रक्रिया पूरी किए बिना संस्था के आंतरिक स्तर पर उसी विषय को पुनः उठाने का दावा सामान्यतः स्वीकार नहीं किया जाएगा।
(ङ) तथापि, किसी सदस्य का वैधानिक अधिकार समाप्त नहीं होगा और लागू कानून के अंतर्गत उपलब्ध कानूनी उपचार को इस प्रावधान द्वारा प्रतिबंधित नहीं माना जाएगा।
9. चुनाव की निष्पक्षता
चुनाव आयुक्त समिति किसी भी उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में प्रचार, पक्षपात अथवा अनुचित हस्तक्षेप नहीं करेगी तथा सभी उम्मीदवारों को संविधान एवं चुनाव नियमों के अनुसार समान अवसर प्रदान करेगी।
10. चुनाव की गोपनीयता
मतपत्र, मतदान से संबंधित अभिलेख, आपत्तियाँ, उम्मीदवारों से संबंधित दस्तावेज एवं चुनाव प्रक्रिया से संबंधित गोपनीय जानकारी को चुनाव आयुक्त समिति आवश्यक सीमा तक सुरक्षित रखेगी तथा बिना अधिकृत कारण के किसी अनधिकृत व्यक्ति को उपलब्ध नहीं कराएगी।
11. अनुशासन एवं व्यवस्था
चुनाव के दौरान कोई उम्मीदवार अथवा सदस्य अनुशासनहीनता, दबाव, धमकी, विवाद, अनुचित प्रचार अथवा चुनाव प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है तो चुनाव आयुक्त समिति उसे चेतावनी दे सकती है तथा संविधान/चुनाव नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई हेतु सक्षम संस्था के समक्ष मामला रख सकती है।
12. चुनाव परिणाम
चुनाव आयुक्त समिति द्वारा मतगणना पूर्ण होने के पश्चात चुनाव परिणाम विधिवत घोषित किया जाएगा तथा परिणाम की लिखित प्रति संस्था के अभिलेख में सुरक्षित रखी जाएगी।
13. चुनाव अभिलेख
चुनाव आयुक्त समिति नामांकन पत्र, उम्मीदवारों की सूची, मतदाता सूची, आपत्तियाँ, चुनाव कार्यवाही, परिणाम एवं अन्य आवश्यक चुनावी अभिलेख संस्था को सौंपेगी अथवा निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखेगी।
14. समिति की निष्पक्षता
चुनाव आयुक्त समिति का प्रत्येक सदस्य यह घोषणा करेगा कि वह चुनाव प्रक्रिया में व्यक्तिगत लाभ, रिश्तेदारी, व्यक्तिगत मतभेद, आर्थिक हित अथवा किसी अन्य अनुचित प्रभाव से मुक्त होकर कार्य करेगा।
15. कार्यकारिणी से स्वतंत्र चुनाव संचालन
चुनाव कार्यक्रम प्रारम्भ होने के बाद चुनाव की वास्तविक प्रक्रिया में कार्यकारिणी समिति, पदाधिकारी अथवा कोई अन्य व्यक्ति चुनाव आयुक्त समिति पर अनुचित दबाव, हस्तक्षेप अथवा प्रभाव नहीं डालेगा।
कार्यकारिणी समिति द्वारा उपलब्ध कराई गई सदस्यता/योग्यता संबंधी जानकारी के आधार पर चुनाव आयुक्त समिति चुनाव प्रक्रिया संचालित करेगी तथा चुनाव कार्यक्रम प्रारम्भ होने के बाद चुनाव संचालन से संबंधित आवश्यक निर्णय लेने के लिए अधिकृत होगी।
16. अंतिम प्रावधान
चुनाव आयुक्त समिति संस्था के संविधान, उपनियमों एवं निर्धारित चुनाव नियमों के अनुसार कार्य करेगी। जहाँ किसी विषय पर स्पष्ट प्रावधान उपलब्ध न हो, वहाँ समिति संस्था के हित, निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं समान अवसर के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले सकेगी।
परंतु चुनाव आयुक्त समिति का कोई भी निर्णय संस्था के पंजीकृत संविधान, उपनियमों अथवा लागू कानून के विपरीत नहीं होगा।
संस्था का सदस्य बनने के लिए निम्नलिखित योग्यताऐ आवश्यक होगी
(A) आवेदक संस्था के उदेश्य, नियम, एव सिद्धांतो मे पूर्ण आस्था रखता हो
{B } आवेदक का आचरण सामाजिक रूप से सम्मानजनक एवं मर्यादित हो
{C } आवेदक संस्था के शैक्षणिक, सामाजिक, एवं सेवा कार्यो मै सहयोग करने के लिए तत्पर हो
{D } आवेदक संस्था द्वारा निर्धारित वार्षिक सदस्यता शुल्क जमा कराने के लिए सहमत हो
{ E } आवेदक किसी भी ऐसे कार्य या गतिविधि मै संलिप्त न हो जिसमें संस्था की छवि या प्रतिष्ठा को हानि पहुचती हो
{ F } संस्था की बैठको, कार्यक्रमों एव अभियानो मै समय - समय पर सहभागिता देने की इच्छा रखता हो
{ G } आवेदक माली समाज का हो एवं कार्यकारिणी द्वारा तय क्षेत्र का निवासी हो
{ H } कार्यकारिणी समिति को किसी भी आवेदन को स्वीकार या अस्वीकार करने का पूर्ण अधिकार होगा
{ I } किसी भी सदस्य की सदस्यता नियम के विरूद्ध समाप्त नही की जा सकती और सदस्यता समाप्ति की सूचना सदस्य को अवश्य दी जाएगी
1. संस्था का सत्र
(क) संस्था का सत्र त्रिवार्षिक होगा तथा प्रत्येक त्रिवार्षिक कार्यकाल की अवधि 1 जून से अगले त्रिवर्षीय कार्यकाल की 31 मई तक मानी जाएगी।
(ख) संस्था का प्रत्येक वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक का होगा।
(ग) वित्तीय वर्ष अथवा संस्था के सत्र से संबंधित विषय में यदि भारत सरकार, राज्य सरकार अथवा सक्षम वैधानिक प्राधिकारी द्वारा कोई नियम, अधिनियम, अधिसूचना अथवा निर्देश जारी कर उसमें परिवर्तन किया जाता है, तो लागू कानून के अनुसार किया गया ऐसा परिवर्तन संस्था पर बाध्यकारी एवं मान्य होगा।
2. गणपूर्ति (कोरम)
(क) कार्यकारिणी सभा तथा साधारण सभा की बैठक के लिए कुल वैध सदस्यों की संख्या का न्यूनतम 33 प्रतिशत (एक-तिहाई) सदस्यों का उपस्थित होना गणपूर्ति (Quorum) माना जाएगा।
(ख) बैठक के निर्धारित समय पर गणपूर्ति पूर्ण न होने की स्थिति में अध्यक्ष द्वारा सभा को अधिकतम 15 मिनट के लिए स्थगित किया जा सकेगा।
(ग) 15 मिनट के पश्चात उसी स्थान पर उसी बैठक को पुनः प्रारम्भ किया जा सकेगा। ऐसी पुनः आरम्भ की गई सभा के लिए पुनः गणपूर्ति की शर्त लागू नहीं होगी और उपस्थित सदस्य ही उस बैठक की कार्यवाही संचालित करने के लिए पर्याप्त माने जाएंगे।
(घ) स्थगित कर पुनः आरम्भ की गई सभा में केवल वही कार्यसूची (Agenda) मान्य होगी, जो मूल रूप से स्थगित की गई सभा के लिए निर्धारित थी। उसमें कोई नया विषय नहीं जोड़ा जाएगा।
(ङ) तथापि, यदि कोई ऐसा विषय सामने आता है जो संस्था के हित में अत्यंत आवश्यक एवं तत्काल विचारणीय हो, तो उसे अगली विधिवत बैठक की कार्यसूची में शामिल किया जाएगा, जब तक कि संविधान के किसी अन्य प्रावधान के अंतर्गत उस पर तत्काल निर्णय लेने का स्पष्ट अधिकार न हो।
3. अति आवश्यक सभा
(क) संस्था के हित में किसी आकस्मिक, आपातकालीन अथवा अत्यंत आवश्यक परिस्थिति में अध्यक्ष अथवा सचिव, परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए, विशेष/अति आवश्यक सभा बुला सकेगा।
(ख) ऐसी अति आवश्यक सभा में सामान्य गणपूर्ति (कोरम) की शर्त लागू न करने का अधिकार होगा, बशर्ते कि बैठक की सूचना यथासंभव सभी संबंधित पदाधिकारियों/सदस्यों को दी गई हो।
(ग) अति आवश्यक सभा में लिए गए निर्णय संस्था के संविधान, लागू कानून एवं पंजीकृत नियमों के अधीन होंगे तथा बैठक की संपूर्ण कार्यवाही कार्यवाही-पुस्तिका (Minutes Book) में दर्ज की जाएगी।
(घ) अति आवश्यक सभा में लिए गए निर्णयों की सूचना अगली कार्यकारिणी सभा में प्रस्तुत की जाएगी तथा कार्यकारिणी द्वारा उसका अभिलेखीकरण/अनुमोदन किया जाएगा, जहाँ आवश्यक हो।
4. कार्यवाही की वैधता
गणपूर्ति पूर्ण होने अथवा उपर्युक्त प्रावधान के अनुसार गणपूर्ति के बिना विधिवत पुनः आरम्भ की गई बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा संविधान एवं नियमों के अनुसार लिए गए निर्णय संस्था की कार्यवाही का हिस्सा माने जाएंगे।
5. अध्यक्ष का अधिकार
बैठक की अध्यक्षता करने वाला अध्यक्ष सभा की व्यवस्था, अनुशासन एवं कार्यवाही को संविधान एवं उपनियमों के अनुरूप संचालित करेगा। किसी भी स्थिति में अध्यक्ष का कोई व्यक्तिगत निर्णय संस्था के संविधान एवं लागू कानून के विपरीत मान्य नहीं होगा।
6. कानून की प्रधानता
इस अध्याय के किसी भी प्रावधान का अर्थ ऐसा नहीं लगाया जाएगा जिससे किसी लागू अधिनियम, पंजीकरण नियम, सरकारी निर्देश अथवा सक्षम प्राधिकारी के अनिवार्य प्रावधान का उल्लंघन हो। ऐसी स्थिति में लागू कानून/वैधानिक प्रावधान को प्राथमिकता प्राप्त होगी।
सदस्य के कर्तव्य
संस्था के प्रत्येक सदस्य के निम्नलिखित कर्तव्य होगे
{A ) संस्था के उदेश्यो की पूर्ति हेतु सक्रिय सहयोग देना
(B ) संस्था के नियमों, निर्णयो एव अनुशासन का पालन करना
{C } समय पर वार्षिक शुल्क एव अन्य स्वीकृत सहयोग राशि जमा करवाना
{ D } संस्था की बैठको, आयोजनो एवं अभियानो मे सहभागिता करना
{ E } संस्था की प्रतिष्ठा बनाए रखने हेतु सदैव मर्यादित व्यावहार करना
{F } समाज मै संस्था की सकारात्मक छवि एव कार्यो का प्रचार - प्रचार करना
{ G } संस्था की संपत्ति, दस्तावेजो, एव संसाधनों की सुरक्षा मे सहयोग देना
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सदस्य के अधिकार
संस्था के प्रत्येक वैध सदस्य को निम्नलिखित अधिकार प्राप्त होगे
{A } संस्था की साधारण सभा की बैठको मै भाग लेने का अधिकार
{ B ] संस्था के कार्यक्रमों एव गतिविधियों मै सहभागी बनने का अधिकार
{ C } संस्था की प्रगति एवं कार्यो से संबंधित जानकारी प्राप्त करने का अधिकार
{ D } संस्था के हित मै सुझाव एवं प्रस्ताव रखने का अधिकार
{ E } संस्था के नियमों के अनुसार चुनाव मै मतदान करने तथा पद के लिए प्रत्याशी बनने का अधिकार
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सदस्यता से पृथक किया जाना
कार्यकारिणी समिति द्वारा स्वीकृत किये जाने पर कोई भी सदस्य संस्था की सदस्यता से निम्नलिखित दशाओ मै पृथक { निश्काषित } समझा जाएगा
(A) त्याग पत्र देने पर
(B )मुत्य अथवा पागल हो जाने पर
(C ) किसी भी न्यायालय द्वारा नैतिक अपराध मै दंडित किये जाने पर
(D ) लगातार 3 वर्ष वार्षिक शुल्क न देने की स्थिति पर एव अन्य किसी प्रकार के सहयोग राशि न देने पर
(E ) यदि कोई सदस्य किसी असामाजिक, साम्प्रदायिक या किसी प्रतिबंधित संगठन से संलिप्त पाया जाएगा जिसकी गतिविधि, देश, क्षेत्र, या संस्था के हित मै न हो
(F ) यदि किसी भी विषय मै अपील कर्ता यथासमय पूर्व मै सचिव को लिखित मै पत्र भेज देगा तो कार्यकारिणी मै उस पर विचार - विमर्श किया जा सकेगा
सत्र
{A ) संस्था का सत्र त्रिवार्षिक होगा ओर अवधि 1 जुन से अगले वर्ष की 30 मई तक होगा
(B ) संस्था का वित्तीय वर्ष 1 वर्ष का होगा ओर अवधि 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होगा यदि सरकारी नियमों मै इस संदर्भ मै कोई परिवर्तन होता है तो वह परिवर्तन मान्य होगा
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गण पूर्ति ( कोरम )
कार्यकारिणी सभा व साधारण सभाओ मै 33% सदस्यों का उपस्थित होना अनिवार्य है इसमें की उपस्थिति मै सभा 15 मिनट के लिए स्थागित करके पुनः उसी स्थान पर प्रारम्भ की जा सकेगी पुनः आरम्भ की गई सभा मै गण पूर्ति की गणना नही की जाएगी
(B ) सभा का विषय सूची ( एजेंडा ) वही होगा जो स्थागित हुई सभा की थी इसमें कोई परिवर्तन का अधिकार नही होगा
(C ) अति आवश्यक सभा मै गण पूर्ति ( कोरम ) का ध्यान नही किया जाएगा
कार्यकारिणी समिति
(A ) संस्था की कार्यकारिणी मै निम्न पदाधिकारियों सहित अधिक से अधिक कुल 21 सदस्य हो सकेगे
अध्यक्ष -01
उपाध्यक्ष -01
सचिव -01
कोषाध्यक्ष -01
संगठन मंत्री -01
प्रचार मंत्री -01
कार्यकारिणी सदस्य -09
(B ) कार्यकारिणी समिति के निर्वाचित सदस्यों की संख्या 15 होगी इसके अतिरिक्त कार्यकारिणी समिति को अधिकार होगा कि आवश्यकतानुसाय किसी भी समय अपने सहयोगी के लिए अध्यक्ष व सचिव की सहमति से कार्यकारिणी सदस्यों को विनियुक्त ( को - आंँप्ट ) कर सकती है परन्तु यह संख्या 21 सदस्यों से अधिक नही हो सकती
(C) कार्यकारिणी समिति अपनी प्रथम सभा मै ही लेखा निरीक्षक आंडिटर की नियुक्ति करेगी जो कार्यकारिणी समिति का सदस्य नही होगा
(D ) कार्यकारिणी समिति मै 7 गाँवो का प्रतिनिधित्व इस प्रकार निर्धारित किया जाएगा
कुसीप -01
सिवाना - 02
भवराणी व सराणा -01
नोसरा -01
सुगालिया -01
मायलावास -15
कुल संख्या 21
इस प्रकार सभी गाँवो को उचित प्रतिनिधित्व देते हुए 21 सदस्यों की कार्यकारिणी समिति गठित की जाएगी
कार्यकारिणी समिति के अधिकार
{A) संस्था की नीतियों, योजनाओं, एवं कार्यक्रम निर्धारित करना
(B ) संस्था की आय - व्यय, बजट, एव वित्तिय निर्णय लेना
(C) आवश्यकता अनुसार उप समितियां का गठन करना
(D ) कर्मचारियों / शिक्षकों की नियुक्ति, सेवा शर्ते एव आवश्यक अनुशासनात्मक कार्यवाही करना
( E ) संस्था की संपत्ति, भवन, स्कूल, लाइब्रेरी, व अन्य एवं संसाधनों के रख रखाव एवं र विकास संबंधि निर्णय लेना
(F ) सदस्यता प्रदान करना या नियम अनुसार सदस्यता निरस्त करना
( G ) दान, सहयोग राशि, एव अनुदान स्वीकार करना
(H ) विशेष परिस्थिति मै आपात बैठक बुलाकर निर्णय लेना
( I ) संस्था के उदेश्यों की पूर्ति हेतु आवश्यक नियम, एव, उप नियम बनाना, या संसोधित करना
( J ) संस्था की प्रगति के लिए अन्य संस्थाओ से सम्बन्ध स्थापित करना ओर उनके यहा अपने प्रतिनिधि भेजना व अनके प्रतिनिधियो को आमंत्रित करना शिक्षा के क्षेत्र मै मिलकर एक - दुसरे की योजना साझा करनी एवं छात्रों कि सहायता करनी
(K ) कार्यकारिणी समिति को अधिकार होगा कि सत्र मै हुई सभाओ मे लगातार तीन बार बिना किसी उचित कारण के जिसका कोई उचित स्पष्टीकरण न दिया गया हो अनुपस्थित कार्यकारिणी सदस्य का पद रिक्त घोषित कर उस पर नयी नियुक्ति कर सकती है
साधारण सभा के अधिकार एवं कर्तव्य
प्रस्तावना:
साधारण सभा संस्था की सर्वोच्च सामान्य सभा होगी। संस्था के मूल उद्देश्यों, विधान, उपनियम, वित्तीय पारदर्शिता एवं सदस्यों के सामूहिक हितों की रक्षा करना साधारण सभा का प्रमुख दायित्व होगा। संस्था के नियमित प्रशासन एवं कार्यों के संचालन हेतु कार्यकारिणी को प्रदत्त कार्यकारी अधिकारों का सम्मान करते हुए साधारण सभा अपने वैधानिक अधिकारों का प्रयोग करेगी।
A — विधान एवं उपनियम
साधारण सभा को संस्था के विधान, नियम एवं उपनियमों को स्वीकृत करने तथा आवश्यकतानुसार उनमें संशोधन, परिवर्धन या विलोपन का प्रस्ताव पारित करने का अधिकार होगा, बशर्ते ऐसी कार्रवाई लागू कानून एवं पंजीकरण प्राधिकारी के नियमों के अनुरूप हो।
B — निर्वाचन
साधारण सभा संस्था के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, ,सचिव , कोषाध्यक्ष तथा अन्य पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों का निर्वाचन निर्धारित प्रक्रिया एवं उपनियमों के अनुसार करेगी।
C — वार्षिक लेखा
संस्था का वार्षिक आय-व्यय विवरण एवं वित्तीय प्रतिवेदन साधारण सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सभा उस पर विचार कर नियमानुसार स्वीकृति प्रदान करेगी तथा आवश्यक सुझाव दे सकेगी।
D — वार्षिक बजट
कार्यकारिणी द्वारा प्रस्तुत आगामी वित्तीय वर्ष के अनुमानित आय-व्यय बजट पर साधारण सभा विचार कर उसे अनुमोदित करेगी। आवश्यकतानुसार संस्था के हित में उचित संशोधन अथवा दिशा-निर्देश दिए जा सकेंगे।
E — अपील एवं अभ्यावेदन
किसी सदस्य द्वारा संस्था के नियमों के अंतर्गत प्रस्तुत अपील, अभ्यावेदन अथवा शिकायत पर साधारण सभा नियमानुसार विचार कर उचित निर्णय दे सकेगी।
F — कार्यकारिणी के कार्यों की समीक्षा
साधारण सभा को कार्यकारिणी द्वारा किए गए कार्यों एवं संस्था की प्रगति की समीक्षा करने का अधिकार होगा। ऐसी समीक्षा का उद्देश्य कार्यकारिणी के नियमित प्रशासन में अनावश्यक हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि संस्था की पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना होगा।
G — संस्था की संपत्ति
संस्था की चल एवं अचल संपत्ति, भवन, भूमि, पुस्तकालय, उपकरण, अभिलेख एवं अन्य परिसंपत्तियों की सुरक्षा एवं संस्था के उद्देश्यों के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करना साधारण सभा का दायित्व होगा।
H — संस्था के हितों की रक्षा
साधारण सभा संस्था की प्रतिष्ठा, मूल उद्देश्य, सामाजिक हित, शैक्षणिक भावना एवं संस्थागत एकता की रक्षा के लिए आवश्यक निर्णय एवं दिशा-निर्देश दे सकेगी।
I — आय एवं वित्तीय अनुशासन
सदस्यता शुल्क, दान, सहयोग राशि, अनुदान एवं अन्य वैध आय के उचित लेखांकन तथा संस्था के निर्धारित उद्देश्यों में उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित करना साधारण सभा का दायित्व होगा।
J — योजनाओं एवं कार्यक्रमों का अनुमोदन
संस्था द्वारा संचालित अथवा प्रस्तावित शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, जनकल्याणकारी एवं प्रतिभा सम्मान संबंधी महत्वपूर्ण योजनाओं पर विचार कर आवश्यकतानुसार अनुमोदन प्रदान करना।
K — कार्यकारिणी को दिशा-निर्देश
साधारण सभा संस्था की व्यापक नीति एवं उद्देश्यों के संबंध में कार्यकारिणी को आवश्यक दिशा-निर्देश दे सकेगी। कार्यकारिणी संस्था के दैनिक प्रशासन एवं कार्य संचालन में अपने उपनियमगत अधिकारों का स्वतंत्र रूप से प्रयोग करेगी।
L — लेखा एवं अभिलेख
संस्था के लेखा-जोखा, सदस्य रजिस्टर, कार्यवाही पुस्तिका, संपत्ति रजिस्टर एवं अन्य आवश्यक अभिलेखों को नियमानुसार सुरक्षित एवं व्यवस्थित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
M — सदस्यता
सदस्यता प्रदान करने, नवीनीकरण, निलंबन अथवा समाप्ति से संबंधित मामलों पर संस्था के पंजीकृत विधान एवं उपनियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
N — समितियों का गठन
संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु आवश्यक स्थायी समिति, के गठन को साधारण सभा स्वीकृति प्रदान कर सकेगी। उनके अधिकार एवं कार्यक्षेत्र उपनियमों के अनुसार निर्धारित होंगे।
O — महत्वपूर्ण संपत्ति संबंधी निर्णय
संस्था की अचल संपत्ति के क्रय, विक्रय, हस्तांतरण, दीर्घकालीन पट्टे अथवा अन्य महत्वपूर्ण संपत्ति संबंधी मामलों में, जहाँ कानून अथवा उपनियम द्वारा साधारण सभा की स्वीकृति आवश्यक हो, वहाँ नियमानुसार पूर्व अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा।
P — पदाधिकारियों की जवाबदेही
संस्था के पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्य अपने-अपने निर्धारित दायित्वों के निर्वहन के लिए संस्था के विधान एवं साधारण सभा के प्रति जवाबदेह होंगे।
Q — कोरम एवं बैठक
साधारण सभा की बैठक निर्धारित नोटिस, समय, स्थान एवं वैधानिक कोरम के अनुसार आयोजित की जाएगी तथा बैठक की समस्त कार्यवाही कार्यवाही-पुस्तिका में विधिवत दर्ज की जाएगी।
R — प्रस्ताव एवं संकल्प
साधारण सभा में संस्था के हित से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा सकेंगे। विधिवत विचार-विमर्श एवं मतदान के पश्चात पारित संकल्प संस्था के विधान, उपनियम एवं लागू कानून के अधीन प्रभावी होंगे।
S — विशेष साधारण सभा
आवश्यकता पड़ने पर अध्यक्ष, कार्यकारिणी अथवा उपनियमों में निर्धारित सदस्यों की मांग पर विशेष साधारण सभा बुलाई जा सकेगी। ऐसी सभा का आयोजन निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
T — पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व
साधारण सभा यह सुनिश्चित करेगी कि संस्था के कार्य निष्पक्षता, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं वित्तीय अनुशासन के साथ संचालित हों तथा संस्था के संसाधनों का दुरुपयोग न हो।
U — उपयोग एवं जनहित
संस्था की निधि एवं संपत्ति का उपयोग केवल संस्था के स्वीकृत उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। किसी सदस्य अथवा पदाधिकारी को संस्था की संपत्ति पर व्यक्तिगत स्वामित्व अथवा निजी लाभ का अधिकार नहीं होगा, सिवाय ऐसे वैध भुगतान/प्रतिपूर्ति के जो नियमों के अनुसार अनुमत हों।
V — वार्षिक प्रतिवेदन
कार्यकारिणी द्वारा संस्था की वार्षिक गतिविधियों, उपलब्धियों, आय-व्यय एवं आगामी योजनाओं का प्रतिवेदन साधारण सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिस पर सभा विचार कर आवश्यक सुझाव एवं दिशा-निर्देश दे सकेगी।
W — विवाद निवारण
संस्था के सदस्यों अथवा पदाधिकारियों के मध्य उत्पन्न आंतरिक विवादों का समाधान प्रथम स्तर पर संस्था के विधान एवं उपनियमों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। व्यक्तिगत मतभेद को संस्था के कार्य में बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।
X — विशेष वित्तीय विषय
संस्था के ऐसे महत्वपूर्ण वित्तीय विषय जिनके लिए कानून, पंजीकृत विधान अथवा उपनियमों के अनुसार साधारण सभा की स्वीकृति आवश्यक हो, उन पर साधारण सभा द्वारा विधिवत विचार एवं निर्णय किया जाएगा।
Y — संस्था का दीर्घकालीन विकास
साधारण सभा संस्था के दीर्घकालीन विकास, शैक्षणिक उन्नति, सामाजिक उपयोगिता, सेवा कार्यों एवं भावी पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतिगत निर्णय एवं मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
Z — सर्वोच्च सामान्य निकाय
साधारण सभा संस्था का सर्वोच्च सामान्य एवं नीतिगत निकाय होगी। संस्था के मूल उद्देश्य, विधान, उपनियम, निर्वाचन, वार्षिक लेखा एवं ऐसे महत्वपूर्ण विषय जिन पर कानून अथवा उपनियम के अनुसार साधारण सभा का अधिकार निर्धारित है, उन पर साधारण सभा का निर्णय मान्य होगा।
परंतु यह स्पष्ट किया जाता है कि संस्था के दैनिक प्रशासन, नियमित संचालन, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, कार्यालयीन व्यवस्था तथा उपनियमों द्वारा कार्यकारिणी को प्रदत्त कार्यकारी अधिकारों के मामलों में कार्यकारिणी संस्था की मुख्य कार्यकारी निकाय होगी। कार्यकारिणी द्वारा अपने अधिकार-क्षेत्र में विधिवत बैठक में लिए गए निर्णय केवल व्यक्तिगत असहमति के आधार पर अमान्य नहीं माने जाएंगे।
विशेष संरक्षण प्रावधान
1. साधारण सभा एवं कार्यकारिणी के अधिकारों में अनावश्यक टकराव उत्पन्न न हो, इसके लिए दोनों निकाय अपने-अपने निर्धारित अधिकार-क्षेत्र में कार्य करेंगे।
2. कार्यकारिणी द्वारा अपने वैधानिक अधिकार-क्षेत्र में विधिवत लिया गया निर्णय तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक उसे कार्यकारिणी द्वारा स्वयं संशोधित न किया जाए अथवा सक्षम निकाय द्वारा विधान, उपनियम एवं लागू कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परिवर्तित/निरस्त न किया जाए।
3. यदि कार्यकारिणी के किसी निर्णय में प्रशासनिक, तकनीकी अथवा व्यवहारिक कमी पाई जाती है, तो कार्यकारिणी को उस निर्णय का पुनर्विचार, संशोधन, स्पष्टीकरण अथवा सुधार करने का अधिकार होगा।
4. साधारण सभा कार्यकारिणी के कार्यों की समीक्षा कर सकती है, लेकिन कार्यकारिणी को प्राप्त नियमित कार्यकारी एवं प्रशासनिक अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करेगी।
5. साधारण सभा का कोई भी निर्णय संस्था के पंजीकृत विधान, उपनियम अथवा लागू कानून के विपरीत नहीं होगा।
6. संस्था के प्रत्येक सदस्य एवं पदाधिकारी का कर्तव्य होगा कि वह संस्था की एकता, अनुशासन, पारदर्शिता, प्रतिष्ठा एवं सामूहिक हित को व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर रखे।
> अंतिम वैधानिक वाक्य:
“इस अध्याय में वर्णित साधारण सभा के अधिकार एवं कर्तव्य संस्था के पंजीकृत विधान, उपनियम तथा समय-समय पर लागू प्रासंगिक कानून के अधीन होंगे। किसी भी स्थिति में ऐसा कोई निर्णय या प्रावधान प्रभावी नहीं माना जाएगा जो लागू कानून अथवा सक्षम पंजीकरण प्राधिकारी के वैधानिक आदेश के प्रतिकूल हो।”
अध्यक्ष के अधिकार, कर्तव्य एवं जिम्मेदारियाँ
1. संस्था का प्रमुख:
अध्यक्ष संस्था का प्रमुख पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी का अध्यक्ष होगा तथा संस्था के उद्देश्यों, पंजीकृत संविधान एवं उपनियमों के अनुरूप संस्था का मार्गदर्शन एवं नेतृत्व करेगा।
2. बैठकों की अध्यक्षता:
अध्यक्ष साधारण सभा, कार्यकारिणी एवं अन्य अधिकृत बैठकों की अध्यक्षता करेगा तथा बैठक की कार्यवाही को निष्पक्ष एवं सुव्यवस्थित रूप से संचालित करेगा।
3. बैठक बुलाने का अधिकार:
अध्यक्ष आवश्यकता पड़ने पर कार्यकारिणी की बैठक बुलाने हेतु सचिव को निर्देश दे सकेगा तथा विशेष अथवा आवश्यक परिस्थितियों में संस्था के हित में बैठक बुलाने की पहल कर सकेगा।
4. निर्णयों का क्रियान्वयन:
अध्यक्ष यह सुनिश्चित करेगा कि साधारण सभा एवं कार्यकारिणी द्वारा विधिवत पारित निर्णयों का नियमानुसार पालन एवं क्रियान्वयन हो।
5. मार्गदर्शन एवं नेतृत्व:
अध्यक्ष संस्था की शिक्षा, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, जनकल्याणकारी एवं अन्य गतिविधियों में आवश्यक मार्गदर्शन एवं नेतृत्व प्रदान करेगा।
6. संस्था का प्रतिनिधित्व:
अध्यक्ष संस्था का प्रतिनिधित्व सरकारी, गैर-सरकारी, सामाजिक एवं अन्य संस्थाओं/मंचों के समक्ष कर सकेगा तथा संस्था के हित में आवश्यक संवाद एवं समन्वय करेगा।
7. अनुशासन एवं एकता:
अध्यक्ष संस्था में अनुशासन, पारदर्शिता, आपसी सम्मान, सद्भाव एवं एकता बनाए रखने हेतु आवश्यक मार्गदर्शन देगा।
8. मतभेद की स्थिति:
किसी प्रस्ताव पर मत बराबर होने की स्थिति में अध्यक्ष को निर्णायक मत देने का अधिकार होगा, बशर्ते कि किसी लागू कानून या उपनियम में अन्यथा प्रावधान न हो।
9. आपातकालीन अधिकार:
ऐसी आकस्मिक परिस्थिति जिसमें संस्था के हित की तत्काल रक्षा आवश्यक हो और कार्यकारिणी की बैठक तत्काल बुलाना संभव न हो, अध्यक्ष आवश्यक अंतरिम निर्णय ले सकेगा। ऐसे निर्णय की सूचना एवं कारण अगली कार्यकारिणी बैठक में प्रस्तुत करना तथा नियमानुसार अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक होगा।
10. आकस्मिक व्यय का विशेष अधिकार:
संस्था के हित में उत्पन्न किसी आकस्मिक अथवा अत्यावश्यक परिस्थिति में अध्यक्ष अपने दायित्व पर अधिकतम ₹1,00,000/- (एक लाख रुपये मात्र) तक का व्यय स्वीकृत/कर सकेगा। ऐसा व्यय संस्था के उद्देश्य, कार्य एवं हित से संबंधित होना आवश्यक होगा। उक्त व्यय का पूरा विवरण, बिल/वाउचर एवं कारण सहित अगली कार्यकारिणी बैठक में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
11. वित्तीय नियंत्रण एवं निगरानी:
अध्यक्ष संस्था की वित्तीय पारदर्शिता, आय-व्यय के उचित लेखांकन तथा निधि के नियमानुसार उपयोग की निगरानी करेगा।
12. व्यय-वाउचर की स्वीकृति:
संस्था द्वारा किए गए वैध एवं स्वीकृत व्यय से संबंधित वाउचर/भुगतान दस्तावेजों पर अध्यक्ष अपने हस्ताक्षर द्वारा नियमानुसार स्वीकृति प्रदान कर सकेगा। जहाँ आवश्यक हो, सचिव एवं कोषाध्यक्ष की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
13. बैंक खाते का संचालन:
अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष में से उपनियमों/कार्यकारिणी द्वारा निर्धारित अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के संयुक्त हस्ताक्षर से संस्था के बैंक खातों का संचालन किया जाएगा। बैंक संबंधी आवश्यक प्रपत्र, चेक, भुगतान निर्देश एवं अन्य संबंधित दस्तावेजों पर अध्यक्ष नियमानुसार हस्ताक्षर कर सकेगा।
14. पदाधिकारियों के साथ समन्वय:
अध्यक्ष सचिव, कोषाध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर संस्था के कार्यों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करेगा।
15. अभिलेख एवं दस्तावेज:
अध्यक्ष संस्था के महत्वपूर्ण अभिलेखों, निर्णयों, वित्तीय दस्तावेजों एवं अन्य आवश्यक रिकॉर्ड के सुरक्षित एवं पारदर्शी रख-रखाव की निगरानी करेगा।
16. समिति/उपसमिति:
उपनियमों में प्रदत्त अधिकार अथवा कार्यकारिणी के अनुमोदन के अनुसार अध्यक्ष आवश्यकतानुसार समितियों/उपसमितियों के गठन एवं उनके कार्यों के समन्वय हेतु प्रस्ताव रख सकेगा।
17. नियुक्तियों में भूमिका:
संस्था के कर्मचारी, प्रभारी, समिति सदस्य अथवा अन्य जिम्मेदारियों से संबंधित नियुक्ति/दायित्व निर्धारण में अध्यक्ष आवश्यक भूमिका निभाएगा तथा जहाँ कार्यकारिणी की स्वीकृति आवश्यक हो, वहाँ प्रस्ताव कार्यकारिणी के समक्ष रखा जाएगा।
18. कार्यक्रमों की रूपरेखा:
संस्था द्वारा आयोजित किसी भी प्रमुख कार्यक्रम की रूपरेखा अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष से विचार-विमर्श कर तैयार करेगा तथा आवश्यकतानुसार उसे कार्यकारिणी के समक्ष अनुमोदन एवं पारित कराने हेतु प्रस्तुत करेगा।
19. संस्था के हितों की रक्षा:
अध्यक्ष संस्था की संपत्ति, निधि, प्रतिष्ठा, अभिलेख एवं वैधानिक हितों की रक्षा हेतु आवश्यक कदम उठाएगा।
20. वार्षिक कार्यों की समीक्षा:
अध्यक्ष संस्था के वार्षिक कार्यों एवं कार्यक्रमों की समीक्षा करेगा तथा भविष्य की योजनाओं एवं गतिविधियों के लिए कार्यकारिणी को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
21. संस्था की एकता एवं गरिमा:
अध्यक्ष संस्था की एकता, प्रतिष्ठा, अनुशासन एवं गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा तथा सभी सदस्यों के साथ निष्पक्ष एवं सम्मानजनक व्यवहार करेगा।
22. कार्यकारिणी के साथ सामंजस्य:
अध्यक्ष संस्था के हित में कार्यकारिणी के साथ सामंजस्य एवं सहयोग से कार्य करेगा। संस्था के महत्वपूर्ण नीतिगत, वित्तीय एवं दीर्घकालीन विषयों पर कार्यकारिणी का सामूहिक निर्णय मान्य होगा।
23. अधिकारों की सीमा:
अध्यक्ष संस्था की अचल/चल संपत्ति को बेचने, हस्तांतरित करने, गिरवी रखने, संस्था पर बड़ा वित्तीय दायित्व डालने अथवा संस्था के मूल उद्देश्य/संविधान में परिवर्तन करने का निर्णय अकेले नहीं ले सकेगा। ऐसे विषयों पर उपनियमों के अनुसार कार्यकारिणी एवं जहाँ आवश्यक हो, साधारण सभा की स्वीकृति अनिवार्य होगी।
24. आपातकालीन निर्णय की जवाबदेही:
अध्यक्ष द्वारा आपातकालीन परिस्थिति में लिए गए किसी भी निर्णय का पूर्ण विवरण अगली कार्यकारिणी बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यकारिणी संस्था के हित, नियम एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर उसके अनुमोदन/पुष्टि पर निर्णय करेगी।
25. निष्पक्षता एवं पद की गरिमा:
अध्यक्ष व्यक्तिगत हित, व्यक्तिगत मतभेद अथवा किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव से ऊपर उठकर संस्था के सामूहिक हित, उद्देश्य एवं संविधान के अनुरूप कार्य करेगा।
विशेष प्रावधान
“अध्यक्ष संस्था का संरक्षक, मार्गदर्शक एवं कार्यकारिणी का प्रमुख होगा। संस्था के सुचारु संचालन, अनुशासन, एकता एवं उद्देश्यों की पूर्ति हेतु अध्यक्ष को आवश्यक प्रशासनिक, प्रतिनिधित्व एवं समन्वय संबंधी अधिकार प्राप्त होंगे। अध्यक्ष अपने अधिकारों का प्रयोग संस्था के पंजीकृत संविधान, लागू कानून, उपनियमों तथा कार्यकारिणी के विधिवत पारित निर्णयों के अनुरूप करेगा।
अध्यक्ष को संस्था के हित में आकस्मिक एवं अत्यावश्यक परिस्थितियों में अधिकतम ₹1,00,000/- तक का व्यय करने का विशेष अधिकार होगा, जिसका पूर्ण विवरण अगली कार्यकारिणी बैठक में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
अध्यक्ष द्वारा किए गए कार्य संस्था के हित, उद्देश्य एवं नियमों के अनुरूप होने चाहिए। किसी विषय पर अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के बीच मतभेद उत्पन्न होने की स्थिति में निर्णय संस्था के पंजीकृत संविधान एवं उपनियमों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिया जाएगा।
अध्यक्ष का पद संस्था की एकता, गरिमा, पारदर्शिता एवं हितों की रक्षा के लिए सर्वोपरि जिम्मेदारी वाला पद होगा तथा अध्यक्ष संस्था के दीर्घकालीन हितों को व्यक्तिगत अथवा तात्कालिक हितों से सदैव ऊपर रखेगा।”
उपाध्यक्ष के अधिकार, कर्तव्य एवं जिम्मेदारियाँ
1. अध्यक्ष का सहयोगी:
उपाध्यक्ष संस्था के अध्यक्ष का प्रमुख सहयोगी होगा तथा संस्था के उद्देश्यों, संविधान एवं उपनियमों के अनुरूप अध्यक्ष को आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
2. अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यभार:
अध्यक्ष की अनुपस्थिति, अस्वस्थता, अवकाश अथवा अस्थायी रूप से कार्य करने में असमर्थता की स्थिति में उपाध्यक्ष अध्यक्ष के निर्देशानुसार एवं उपनियमों के अधीन अध्यक्ष के कार्यों का निर्वहन करेगा।
3. अध्यक्ष के अधिकारों का अस्थायी प्रयोग:
अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष को केवल आवश्यक एवं नियमित कार्यों के संबंध में अध्यक्ष के अधिकारों का प्रयोग करने का अधिकार होगा। संस्था की महत्वपूर्ण नीतिगत, वित्तीय अथवा संपत्ति संबंधी कार्रवाई के लिए कार्यकारिणी की स्वीकृति आवश्यक होगी, जब तक उपनियमों में अन्यथा प्रावधान न हो।
4. बैठकों में भूमिका:
अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष कार्यकारिणी अथवा अन्य अधिकृत बैठकों की अध्यक्षता कर सकेगा तथा बैठक की कार्यवाही को नियमानुसार संचालित करेगा।
5. संस्था का प्रतिनिधित्व:
अध्यक्ष द्वारा अधिकृत किए जाने पर उपाध्यक्ष सरकारी, गैर-सरकारी, सामाजिक एवं अन्य संस्थाओं के समक्ष संस्था का प्रतिनिधित्व कर सकेगा।
6. कार्यकारिणी के निर्णयों का पालन:
उपाध्यक्ष कार्यकारिणी द्वारा विधिवत पारित निर्णयों के क्रियान्वयन में अध्यक्ष एवं सचिव को आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा।
7. संस्था की गतिविधियों में सहयोग:
उपाध्यक्ष संस्था के शिक्षा, सामाजिक, सांस्कृतिक, जनकल्याणकारी एवं अन्य कार्यक्रमों के संचालन एवं विस्तार में सक्रिय सहयोग करेगा।
8. समितियों का समन्वय:
कार्यकारिणी द्वारा सौंपे गए कार्यों के अनुसार उपाध्यक्ष विभिन्न समितियों, प्रभारी एवं सदस्यों के बीच समन्वय स्थापित कर सकेगा।
9. कार्यक्रमों की जिम्मेदारी:
संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में उपाध्यक्ष को कार्यकारिणी अथवा अध्यक्ष द्वारा निर्धारित विशेष जिम्मेदारी दी जा सकेगी तथा वह निर्धारित समय पर कार्य की प्रगति से अध्यक्ष/सचिव को अवगत कराएगा।
10. अनुशासन एवं एकता:
उपाध्यक्ष संस्था में अनुशासन, आपसी सम्मान, सद्भाव एवं एकता बनाए रखने में सहयोग करेगा तथा किसी विवाद की स्थिति में संस्था के नियमों के अनुसार समाधान हेतु प्रयास करेगा।
11. संस्था के हितों की रक्षा:
उपाध्यक्ष संस्था की प्रतिष्ठा, संपत्ति, अभिलेख एवं हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा।
12. सदस्य संपर्क एवं सहभागिता:
उपाध्यक्ष सदस्यों से संपर्क बनाए रखने, उनकी उचित समस्याओं/सुझावों को सुनने तथा आवश्यकतानुसार उन्हें अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्तुत करने में सहयोग करेगा।
13. नई योजनाओं में भूमिका:
उपाध्यक्ष संस्था के विकास एवं विस्तार के लिए नई योजनाओं, कार्यक्रमों एवं सामाजिक/शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में सुझाव कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्तुत कर सकेगा।
14. आकस्मिक परिस्थिति में सहयोग:
किसी आकस्मिक परिस्थिति में उपाध्यक्ष संस्था के हित में आवश्यक प्रारंभिक कार्रवाई कर सकेगा तथा इसकी सूचना तत्काल अध्यक्ष एवं सचिव को देगा। कोई बड़ा वित्तीय अथवा नीतिगत निर्णय उपाध्यक्ष अकेले नहीं ले सकेगा, जब तक उसे उपनियमों अथवा कार्यकारिणी द्वारा स्पष्ट अधिकार प्राप्त न हो।
15. वित्तीय अधिकार:
उपाध्यक्ष को संस्था की निधि से स्वतंत्र रूप से व्यय करने अथवा वित्तीय दायित्व उत्पन्न करने का अधिकार नहीं होगा, जब तक कार्यकारिणी द्वारा लिखित/विधिवत स्वीकृति अथवा उपनियमों में स्पष्ट अधिकार प्रदान न किया गया हो।
16. अभिलेख एवं जानकारी:
संस्था के कार्यों से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं अभिलेखों का निरीक्षण, अध्यक्ष/सचिव की अनुमति तथा संस्था की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कर सकेगा।
17. कार्यों की रिपोर्ट:
उपाध्यक्ष को सौंपे गए किसी भी विशेष कार्य की प्रगति एवं परिणाम की जानकारी समय-समय पर अध्यक्ष एवं सचिव को देना उसका कर्तव्य होगा।
18. कार्यकारिणी में भागीदारी:
उपाध्यक्ष कार्यकारिणी का सदस्य होगा तथा संस्था की नीतियों, योजनाओं एवं निर्णयों में सक्रिय एवं रचनात्मक भागीदारी करेगा।
19. निष्पक्षता:
उपाध्यक्ष व्यक्तिगत हित, व्यक्तिगत मतभेद एवं पक्षपात से ऊपर उठकर संस्था के सामूहिक हित में कार्य करेगा।
20. कार्यकारिणी के प्रति उत्तरदायित्व:
उपाध्यक्ष अपने पद के अंतर्गत किए गए कार्यों के लिए अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के प्रति उत्तरदायी होगा।
विशेष प्रावधान
“उपाध्यक्ष अध्यक्ष का प्रमुख सहयोगी एवं अध्यक्ष की अनुपस्थिति में संस्था के कार्यों को निरंतर बनाए रखने वाला पदाधिकारी होगा। अध्यक्ष के पद पर रहते हुए उपाध्यक्ष अध्यक्ष के अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करेगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष को संस्था के नियमित एवं आवश्यक कार्यों का संचालन करने का अधिकार होगा।
उपाध्यक्ष द्वारा अध्यक्ष की अनुपस्थिति में किए गए महत्वपूर्ण कार्यों की सूचना अध्यक्ष की वापसी पर तथा आवश्यकतानुसार अगली कार्यकारिणी बैठक में प्रस्तुत की जाएगी।
उपाध्यक्ष के अधिकार संस्था के पंजीकृत संविधान, उपनियमों, कार्यकारिणी के निर्णयों तथा अध्यक्ष द्वारा सौंपे गए दायित्वों के अधीन होंगे। उपाध्यक्ष संस्था की एकता, अनुशासन, गरिमा एवं हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।”
सचिव के अधिकार, कर्तव्य एवं जिम्मेदारियाँ
1. संस्था का मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी:
सचिव संस्था का मुख्य प्रशासनिक एवं कार्यकारी पदाधिकारी होगा तथा संस्था के दैनिक कार्यों एवं प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन पंजीकृत संविधान, उपनियमों एवं कार्यकारिणी के विधिवत पारित निर्णयों के अनुसार करेगा।
2. संस्था के कार्यों का संचालन:
सचिव संस्था की समस्त गतिविधियों, कार्यक्रमों, बैठकों एवं प्रशासनिक कार्यों को व्यवस्थित एवं प्रभावी रूप से संचालित करने का प्रमुख उत्तरदायी होगा।
3. बैठक की सूचना:
अध्यक्ष के निर्देशानुसार साधारण सभा एवं कार्यकारिणी की बैठकों की सूचना निर्धारित समय एवं प्रक्रिया के अनुसार सभी संबंधित सदस्यों को देना सचिव का कर्तव्य होगा।
4. बैठक की कार्यवाही:
सचिव बैठकों की कार्यवाही, प्रस्ताव एवं निर्णयों को विधिवत कार्यवाही-पुस्तिका में दर्ज करेगा तथा अध्यक्ष से अनुमोदन/हस्ताक्षर करवाकर अभिलेख सुरक्षित रखेगा।
5. निर्णयों का क्रियान्वयन:
साधारण सभा एवं कार्यकारिणी द्वारा विधिवत पारित निर्णयों को संबंधित पदाधिकारियों, समितियों एवं प्रभारियों तक पहुँचाना तथा उनके क्रियान्वयन का समन्वय करना सचिव की जिम्मेदारी होगी।
6. पत्राचार का अधिकार:
सचिव संस्था की ओर से सरकारी, गैर-सरकारी, सामाजिक एवं अन्य संस्थाओं/व्यक्तियों के साथ आवश्यक आधिकारिक पत्राचार कर सकेगा तथा प्राप्त पत्रों एवं सूचनाओं का उचित अभिलेख रखेगा।
7. संस्था का प्रतिनिधित्व:
अध्यक्ष के निर्देश अथवा कार्यकारिणी द्वारा अधिकृत किए जाने पर सचिव संस्था का आधिकारिक एवं प्रशासनिक प्रतिनिधित्व कर सकेगा।
8. कार्यक्रमों का संचालन:
संस्था के कार्यक्रमों की रूपरेखा अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष से विचार-विमर्श कर तैयार करेगा, आवश्यक प्रस्ताव कार्यकारिणी के समक्ष रखेगा तथा स्वीकृत कार्यक्रमों के क्रियान्वयन का समन्वय करेगा।
9. समितियों एवं प्रभारियों का समन्वय:
सचिव संस्था की विभिन्न समितियों, प्रभारियों एवं सदस्यों के साथ संपर्क एवं समन्वय बनाए रखेगा तथा कार्यों की प्रगति से अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी को अवगत कराएगा।
10. सदस्यता संबंधी कार्य:
सचिव सदस्यता आवेदन प्राप्त करने, सदस्यता संबंधी अभिलेख रखने तथा निर्धारित नियमों के अनुसार सदस्यता रिकॉर्ड को अद्यतन रखने का कार्य करेगा।
11. संस्था का विस्तार:
सचिव नये सदस्यों को संस्था से जोड़ने, सदस्य संख्या बढ़ाने तथा संस्था का सामाजिक एवं संगठनात्मक विस्तार करने में सक्रिय भूमिका निभाएगा। संस्था को अधिक मजबूत, संगठित एवं प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक प्रयास करेगा।
12. सदस्य रजिस्टर एवं अभिलेख:
सदस्य सूची, पदाधिकारियों का विवरण, बैठक कार्यवाही, प्रस्ताव, पत्राचार, सदस्यता रिकॉर्ड एवं अन्य प्रशासनिक अभिलेख व्यवस्थित एवं सुरक्षित रखना सचिव का दायित्व होगा।
13. वार्षिक रिपोर्ट:
सचिव संस्था की वार्षिक गतिविधियों एवं कार्यों की रिपोर्ट तैयार कर कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्तुत करेगा तथा आवश्यकतानुसार वार्षिक अधिवेशन/साधारण सभा में अनुमोदन हेतु रखेगा।
14. वित्तीय मामलों में समन्वय:
सचिव संस्था के आय-व्यय संबंधी प्रशासनिक कार्यों एवं स्वीकृत गतिविधियों का समन्वय कोषाध्यक्ष के साथ करेगा तथा वित्तीय नियमों एवं पारदर्शिता का पालन सुनिश्चित करने में सहयोग करेगा।
15. आकस्मिक व्यय का अधिकार:
संस्था के हित में उत्पन्न किसी आकस्मिक अथवा अत्यावश्यक परिस्थिति में सचिव अपने दायित्व पर अधिकतम ₹1,00,000/- (एक लाख रुपये मात्र) तक व्यय कर सकेगा। ऐसे प्रत्येक व्यय का कारण, बिल/वाउचर एवं पूर्ण विवरण अगली कार्यकारिणी बैठक में प्रस्तुत करना तथा कार्यकारिणी से उसकी सम्पुष्टि/पुष्टि प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
16. आय-व्यय वाउचर पर हस्ताक्षर:
संस्था के स्वीकृत आय-व्यय से संबंधित वाउचर, बिल एवं भुगतान दस्तावेजों पर सचिव निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपने हस्ताक्षर कर सकेगा। हस्ताक्षर करना मात्र भुगतान की स्वीकृति नहीं माना जाएगा; भुगतान संस्था के स्वीकृत नियम एवं सक्षम निर्णय के अनुसार ही किया जाएगा।
17. बैंक खाते का संचालन:
सचिव अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष के साथ उपनियमों तथा कार्यकारिणी द्वारा निर्धारित संयुक्त हस्ताक्षर व्यवस्था के अनुसार संस्था के बैंक खातों का संचालन करेगा तथा बैंक संबंधी आवश्यक प्रपत्र, चेक एवं दस्तावेजों पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हस्ताक्षर करेगा।
18. संस्था की संपत्ति एवं अभिलेख:
संस्था के प्रमाणपत्र, रजिस्टर, मुहर, पत्राचार, वित्तीय एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों के सुरक्षित रख-रखाव की व्यवस्था करना सचिव का दायित्व होगा।
19. कानूनी एवं पंजीकरण संबंधी कार्य:
संस्था के पंजीकरण, नवीनीकरण, वैधानिक दस्तावेज, सरकारी पत्राचार एवं आवश्यक अनुपालनों के संबंध में अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष एवं अन्य संबंधित पदाधिकारियों के साथ समन्वय करेगा।
20. आपातकालीन प्रशासनिक कार्रवाई:
आकस्मिक परिस्थिति में संस्था के हित में आवश्यक प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई कर सकेगा तथा यथाशीघ्र अध्यक्ष को सूचित करेगा। कोई बड़ा नीतिगत, संपत्ति संबंधी अथवा निर्धारित सीमा से अधिक वित्तीय निर्णय अकेले नहीं ले सकेगा।
21. अध्यक्ष को नियमित जानकारी:
सचिव संस्था की गतिविधियों, प्राप्त पत्राचार, महत्वपूर्ण मामलों, कार्यक्रमों एवं प्रशासनिक विषयों की जानकारी समय-समय पर अध्यक्ष को देगा।
22. कार्यकारिणी के प्रति जवाबदेही:
सचिव अपने पद के अंतर्गत किए गए कार्यों के लिए अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के प्रति उत्तरदायी होगा तथा कार्यकारिणी द्वारा मांगे जाने पर संबंधित विवरण एवं अभिलेख प्रस्तुत करेगा।
23. संस्था की गरिमा एवं गोपनीयता:
सचिव संस्था से संबंधित गोपनीय एवं महत्वपूर्ण जानकारी को अनधिकृत व्यक्तियों के समक्ष प्रकट नहीं करेगा तथा संस्था की प्रतिष्ठा, गरिमा एवं हितों की रक्षा करेगा।
24. अनुशासन एवं एकता:
सचिव संस्था के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं समितियों के बीच समन्वय बनाए रखने तथा संस्था में अनुशासन, सद्भाव एवं एकता को मजबूत करने का कार्य करेगा।
25. प्रस्ताव रखने का अधिकार:
सचिव संस्था के हित एवं विकास से संबंधित प्रस्ताव अध्यक्ष के परामर्श से कार्यकारिणी के समक्ष रख सकेगा। प्रस्ताव का अंतिम निर्णय संस्था के उपनियमों के अनुसार कार्यकारिणी अथवा साधारण सभा द्वारा किया जाएगा।
26. कार्य सौंपने का अधिकार:
सचिव दैनिक प्रशासनिक कार्यों में आवश्यकता के अनुसार कर्मचारियों, प्रभारियों अथवा समितियों को कार्य सौंप सकेगा, लेकिन संस्था की मूल नीति, संपत्ति अथवा महत्वपूर्ण वित्तीय दायित्व से संबंधित निर्णय अकेले नहीं ले सकेगा।
27. कार्यकारिणी के निर्णयों का पालन:
सचिव कार्यकारिणी के सामूहिक एवं विधिवत पारित निर्णयों को लागू करवाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई करेगा और किसी निर्णय के क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाई से अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी को अवगत कराएगा।
28. वार्षिक बजट तैयार करना:
सचिव आगामी/चालू वित्तीय वर्ष के लिए संस्था की अनुमानित आय एवं व्यय का वार्षिक बजट तैयार करने में कोषाध्यक्ष के साथ कार्य करेगा। अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष के साथ बजट की समीक्षा एवं आवश्यक संशोधन के बाद बजट को कार्यकारिणी सभा के समक्ष स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करेगा तथा कार्यकारिणी द्वारा स्वीकृत बजट को वार्षिक अधिवेशन/साधारण सभा में अनुमोदन हेतु रखा जाएगा।
29. बजट के अनुसार कार्य:
स्वीकृत वार्षिक बजट के अनुसार संस्था के कार्यक्रम एवं प्रशासनिक कार्य संचालित करवाने में सचिव मुख्य समन्वयक की भूमिका निभाएगा। बजट से बाहर महत्वपूर्ण व्यय अथवा नया वित्तीय दायित्व उत्पन्न करने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार कार्यकारिणी की स्वीकृति आवश्यक होगी।
30. पद की निरंतरता:
अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सचिव संस्था के नियमित प्रशासनिक कार्यों को बाधित नहीं होने देगा तथा आवश्यकतानुसार उपाध्यक्ष एवं अन्य अधिकृत पदाधिकारियों के साथ समन्वय करेगा।
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विशेष प्रावधान
“सचिव संस्था का मुख्य प्रशासनिक एवं कार्यकारी पदाधिकारी होगा तथा संस्था के दैनिक प्रशासन, पत्राचार, बैठकों, अभिलेखों, सदस्यता, कार्यक्रमों एवं कार्यकारिणी द्वारा विधिवत पारित निर्णयों के क्रियान्वयन का प्रमुख उत्तरदायी होगा। सचिव संस्था के कार्यों का संचालन अध्यक्ष के मार्गदर्शन तथा कार्यकारिणी के सामूहिक निर्णयों के अनुसार करेगा।
सचिव को संस्था के नियमित प्रशासनिक कार्यों के संचालन हेतु आवश्यक अधिकार प्राप्त होंगे। संस्था के हित में आकस्मिक एवं अत्यावश्यक परिस्थिति में सचिव को अधिकतम ₹1,00,000/- तक व्यय करने का अधिकार होगा, परंतु ऐसे प्रत्येक व्यय का पूर्ण विवरण अगली कार्यकारिणी बैठक में प्रस्तुत कर उसकी सम्पुष्टि/पुष्टि करवाना अनिवार्य होगा।
सचिव संस्था के प्रशासनिक कार्यों की रीढ़ के रूप में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, कार्यकारिणी, समितियों एवं सदस्यों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करेगा। सचिव संस्था के विस्तार, नये सदस्यों को जोड़ने, सदस्यता बढ़ाने तथा संस्था को मजबूत एवं सक्रिय बनाने में विशेष भूमिका निभाएगा।
सचिव संस्था की निधि, संपत्ति, मूल नीतियों अथवा दीर्घकालीन वित्तीय दायित्वों के संबंध में कोई महत्वपूर्ण निर्णय अकेले नहीं ले सकेगा, जब तक संविधान, उपनियम अथवा कार्यकारिणी द्वारा उसे स्पष्ट अधिकार प्रदान न किया गया हो।
सचिव द्वारा किए गए सभी महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों का उचित अभिलेख रखा जाएगा तथा कार्यकारिणी द्वारा मांगे जाने पर संबंधित विवरण, दस्तावेज एवं अभिलेख प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष संस्था के सुचारु संचालन में परस्पर समन्वय एवं सहयोग से कार्य करेंगे, जबकि संस्था के नीतिगत एवं महत्वपूर्ण विषयों पर कार्यकारिणी का विधिवत पारित सामूहिक निर्णय सर्वोपरि माना जाएगा।”
कोषाध्यक्ष के अधिकार, कर्तव्य एवं जिम्मेदारियाँ
1. संस्था का प्रमुख वित्तीय पदाधिकारी:
कोषाध्यक्ष संस्था का प्रमुख वित्तीय पदाधिकारी होगा तथा संस्था की आय, व्यय, निधि एवं वित्तीय अभिलेखों के उचित रख-रखाव के लिए उत्तरदायी होगा।
2. आय की प्राप्ति एवं लेखांकन:
संस्था को प्राप्त सदस्यता शुल्क, वार्षिक शुल्क, दान, सहयोग राशि, चढ़ावा, कार्यक्रमों से प्राप्त राशि एवं अन्य वैध आय का उचित लेखा रखना कोषाध्यक्ष का कर्तव्य होगा।
3. राशि की सुरक्षा:
संस्था को प्राप्त समस्त राशि को सुरक्षित रखना तथा निर्धारित समय में संस्था के बैंक खाते में जमा करवाना कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी होगी।
4. बैंक खाते का संचालन:
कोषाध्यक्ष अध्यक्ष एवं सचिव के साथ संस्था के उपनियमों तथा कार्यकारिणी द्वारा निर्धारित संयुक्त हस्ताक्षर व्यवस्था के अनुसार बैंक खाते का संचालन करेगा तथा आवश्यक बैंक दस्तावेजों, चेक एवं भुगतान निर्देशों पर हस्ताक्षर कर सकेगा।
5. नकद राशि की सीमा:
संस्था के पास रखी जाने वाली नकद राशि की अधिकतम सीमा कार्यकारिणी द्वारा निर्धारित की जाएगी। निर्धारित सीमा से अधिक राशि यथाशीघ्र संस्था के बैंक खाते में जमा करवाना आवश्यक होगा।
6. व्यय का भुगतान:
कार्यकारिणी/सक्षम पदाधिकारी द्वारा नियमानुसार स्वीकृत व्यय का भुगतान करेगा तथा प्रत्येक भुगतान के लिए उचित बिल, वाउचर अथवा प्रमाण प्राप्त करना सुनिश्चित करेगा।
7. वाउचर एवं बिल:
प्रत्येक आय एवं व्यय का विधिवत वाउचर/रसीद तैयार करवाना तथा उस पर आवश्यक पदाधिकारियों के हस्ताक्षर करवाकर सुरक्षित रखना कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी होगी।
8. आय-व्यय रजिस्टर:
संस्था की समस्त आय एवं व्यय का नियमित एवं क्रमवार लेखा रखना तथा आय-व्यय रजिस्टर/लेखा-पुस्तक को अद्यतन रखना कोषाध्यक्ष का कर्तव्य होगा।
9. बैंक एवं नकद मिलान:
कोषाध्यक्ष नियमित रूप से बैंक खाते का मिलान संस्था की लेखा-पुस्तकों से करेगा तथा किसी भी अंतर अथवा त्रुटि की जानकारी अध्यक्ष एवं सचिव को देगा।
10. वित्तीय पारदर्शिता:
कोषाध्यक्ष संस्था के सभी वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखेगा तथा संस्था की निधि का उपयोग केवल संस्था के निर्धारित उद्देश्यों एवं विधिवत स्वीकृत कार्यों के लिए सुनिश्चित करेगा।
11. बजट तैयार करना:
सचिव के साथ समन्वय कर आगामी/चालू वित्तीय वर्ष का अनुमानित आय-व्यय बजट तैयार करेगा तथा अध्यक्ष के साथ समीक्षा के बाद कार्यकारिणी के समक्ष स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करेगा।
12. बजट की निगरानी:
कार्यकारिणी द्वारा स्वीकृत बजट के अनुसार आय-व्यय की निगरानी करना तथा बजट से अधिक अथवा अनधिकृत व्यय की स्थिति में अध्यक्ष एवं सचिव को तत्काल अवगत कराना कोषाध्यक्ष का दायित्व होगा।
13. वित्तीय रिपोर्ट:
कोषाध्यक्ष समय-समय पर संस्था की आय-व्यय एवं वित्तीय स्थिति की रिपोर्ट कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्तुत करेगा।
14. वार्षिक आय-व्यय विवरण:
प्रत्येक वित्तीय वर्ष के समाप्त होने पर संस्था का वार्षिक आय-व्यय विवरण तैयार करवाकर कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्तुत करेगा तथा नियमानुसार साधारण सभा/वार्षिक अधिवेशन में अनुमोदन हेतु रखेगा।
15. लेखा परीक्षण:
संस्था के खातों का निर्धारित कानून एवं उपनियमों के अनुसार लेखा परीक्षण करवाने हेतु आवश्यक दस्तावेज एवं लेखे तैयार रखेगा तथा लेखा परीक्षक को आवश्यक जानकारी एवं अभिलेख उपलब्ध करवाएगा।
16. सरकारी एवं वैधानिक अनुपालन:
संस्था के वित्तीय एवं वैधानिक दायित्वों के संबंध में सचिव एवं अन्य अधिकृत पदाधिकारियों के साथ आवश्यक समन्वय करेगा तथा निर्धारित समय में आवश्यक वित्तीय विवरण उपलब्ध करवाएगा।
17. दान एवं सहयोग राशि:
संस्था को प्राप्त दान अथवा सहयोग राशि की विधिवत रसीद जारी करेगा और प्राप्त राशि का पूर्ण लेखा रखेगा। किसी भी राशि को व्यक्तिगत खाते में रखना अथवा संस्था के रिकॉर्ड से बाहर रखना निषिद्ध होगा।
18. सदस्यता शुल्क:
सदस्यों से प्राप्त सदस्यता एवं वार्षिक शुल्क की रसीद जारी करना, उसका लेखा रखना तथा राशि को संस्था के बैंक खाते में जमा करवाना कोषाध्यक्ष का दायित्व होगा।
19. संपत्ति संबंधी वित्तीय रिकॉर्ड:
संस्था की चल-अचल संपत्ति से संबंधित खरीद, भुगतान एवं वित्तीय अभिलेखों को सुरक्षित रखना तथा उनका उचित लेखांकन करना कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी होगी।
20. वित्तीय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर:
नियमों के अनुसार आय-व्यय वाउचर, रसीद, भुगतान दस्तावेज एवं अन्य वित्तीय अभिलेखों पर कोषाध्यक्ष अपने हस्ताक्षर करेगा।
21. वित्तीय अनियमितता की सूचना:
यदि किसी भुगतान, व्यय अथवा वित्तीय लेन-देन में नियमों के विपरीत कोई बात दिखाई दे तो कोषाध्यक्ष भुगतान रोकने/आपत्ति दर्ज करने तथा तत्काल अध्यक्ष एवं सचिव को सूचित करने का अधिकार रखेगा।
22. बिना स्वीकृति भुगतान:
कोषाध्यक्ष संस्था की निधि से ऐसा कोई भुगतान नहीं करेगा जिसकी स्वीकृति उपनियम, बजट अथवा सक्षम कार्यकारिणी/अधिकृत पदाधिकारी द्वारा प्राप्त न हो, सिवाय उन परिस्थितियों के जिनके लिए उपनियम में विशेष प्रावधान किया गया हो।
23. वित्तीय अभिलेखों की सुरक्षा:
कैशबुक, लेजर, रसीद बुक, भुगतान वाउचर, बैंक स्टेटमेंट, चेक रिकॉर्ड, दान रजिस्टर एवं अन्य वित्तीय दस्तावेज सुरक्षित रखना कोषाध्यक्ष का दायित्व होगा।
24. कार्यकारिणी के प्रति जवाबदेही:
कोषाध्यक्ष अपने पद के अंतर्गत किए गए सभी वित्तीय कार्यों के लिए अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के प्रति उत्तरदायी होगा तथा कार्यकारिणी द्वारा मांगे जाने पर पूरा वित्तीय विवरण प्रस्तुत करेगा।
25. पद छोड़ते समय हिसाब:
कार्यकाल समाप्त होने, पद से त्यागपत्र देने अथवा पदमुक्त होने की स्थिति में कोषाध्यक्ष संस्था की समस्त नकद राशि, बैंक संबंधी दस्तावेज, लेखा-पुस्तकें, रसीद बुक, वाउचर एवं अन्य वित्तीय अभिलेख विधिवत नए अधिकृत कोषाध्यक्ष/कार्यकारिणी को सौंपेगा।
26. वित्तीय अनुशासन:
कोषाध्यक्ष संस्था की निधि का व्यक्तिगत उपयोग, व्यक्तिगत खाते में हस्तांतरण अथवा संस्था के उद्देश्य से अलग किसी कार्य में उपयोग नहीं करेगा।
27. वित्तीय सलाह:
कोषाध्यक्ष संस्था की वित्तीय स्थिति के आधार पर अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी को आय बढ़ाने, अनावश्यक व्यय कम करने, बजट प्रबंधन एवं वित्तीय अनुशासन के संबंध में सुझाव दे सकेगा।
28. संस्था के विस्तार में सहयोग:
कोषाध्यक्ष संस्था के विस्तार एवं विकास के लिए सदस्यता, सहयोग राशि एवं वैध वित्तीय संसाधनों को बढ़ाने की योजनाओं में अध्यक्ष एवं सचिव को सहयोग करेगा।
29. आकस्मिक भुगतान:
किसी आकस्मिक परिस्थिति में अध्यक्ष/सचिव द्वारा उपनियमों के अंतर्गत स्वीकृत राशि का भुगतान कोषाध्यक्ष आवश्यक बिल/वाउचर एवं उपलब्ध प्रमाण के आधार पर करेगा और उसका लेखा संस्था की पुस्तकों में दर्ज करेगा।
30. वित्तीय पारदर्शिता एवं निष्पक्षता:
कोषाध्यक्ष किसी व्यक्ति, पदाधिकारी अथवा सदस्य के व्यक्तिगत प्रभाव से मुक्त होकर संस्था के हित में निष्पक्ष, पारदर्शी एवं नियमसम्मत वित्तीय कार्य करेगा।
विशेष प्रावधान
“कोषाध्यक्ष संस्था की वित्तीय व्यवस्था का प्रमुख उत्तरदायी पदाधिकारी होगा। संस्था की समस्त आय, व्यय, निधि, बैंक खाते एवं वित्तीय अभिलेखों का उचित, पारदर्शी एवं नियमानुसार लेखांकन करना कोषाध्यक्ष का प्रमुख कर्तव्य होगा।
कोषाध्यक्ष संस्था की निधि का उपयोग केवल पंजीकृत उद्देश्यों, स्वीकृत बजट तथा कार्यकारिणी/सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत स्वीकृत कार्यों के लिए करेगा। प्रत्येक आय एवं व्यय का उचित प्रमाण, रसीद, बिल अथवा वाउचर रखना अनिवार्य होगा।
अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष संस्था के बैंक खाते का संचालन उपनियमों एवं कार्यकारिणी द्वारा निर्धारित संयुक्त हस्ताक्षर व्यवस्था के अनुसार करेंगे। किसी एक पदाधिकारी को अकेले संस्था की निधि निकालने अथवा बैंक खाते से भुगतान करने का अधिकार नहीं होगा, जब तक उपनियमों में स्पष्ट रूप से ऐसा प्रावधान न किया गया हो।
कोषाध्यक्ष संस्था की वित्तीय स्थिति के संबंध में अध्यक्ष एवं सचिव को समय-समय पर अवगत कराएगा तथा कार्यकारिणी द्वारा मांगे जाने पर आय-व्यय, बैंक शेष, बजट, वाउचर एवं अन्य वित्तीय अभिलेख प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
संस्था की निधि, संपत्ति अथवा वित्तीय अभिलेखों में किसी प्रकार की अनियमितता, गड़बड़ी अथवा अनधिकृत लेन-देन की जानकारी होने पर कोषाध्यक्ष तत्काल अध्यक्ष एवं सचिव को लिखित रूप में सूचित करेगा।
कोषाध्यक्ष का पद संस्था की आर्थिक पारदर्शिता एवं वित्तीय अनुशासन का प्रमुख आधार होगा और वह संस्था की निधि एवं वित्तीय हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।”
संगठन मंत्री के अधिकार, कर्तव्य एवं जिम्मेदारियाँ
1. संगठन मंत्री संस्था का प्रमुख संगठनात्मक पदाधिकारी होगा तथा संस्था के संगठन को मजबूत, सक्रिय एवं व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
2. संस्था के संविधान, उपनियमों, उद्देश्यों तथा कार्यकारिणी द्वारा लिए गए निर्णयों के अनुसार संगठनात्मक कार्य करना संगठन मंत्री का प्रमुख कर्तव्य होगा।
3. संस्था के वर्तमान सदस्यों से नियमित संपर्क बनाए रखना तथा उन्हें संस्था की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ना।
4. नए सदस्यों को संस्था से जोड़ने, सदस्य संख्या बढ़ाने तथा संस्था के कार्यक्षेत्र का विस्तार करने में सक्रिय भूमिका निभाना।
5. संस्था के विभिन्न ग्रामों, क्षेत्रों एवं समाज के सदस्यों के बीच संगठनात्मक समन्वय स्थापित करना।
6. निष्क्रिय सदस्यों को पुनः संस्था की गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास करना।
7. संस्था की बैठकों, कार्यक्रमों, सामाजिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों में अधिक से अधिक सदस्यों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करना।
8. सदस्य संपर्क अभियान, संगठन विस्तार अभियान एवं जनसंपर्क कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर सचिव के माध्यम से कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्तुत करना।
9. संस्था द्वारा स्वीकृत कार्यक्रमों के सफल आयोजन में संबंधित समितियों एवं पदाधिकारियों के साथ समन्वय करना।
10. संस्था के विभिन्न पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों, समितियों एवं सदस्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना।
11. संगठन में आपसी भाईचारा, एकता, अनुशासन एवं सहयोग की भावना को मजबूत करना।
12. सदस्यों के सुझाव, समस्याएँ एवं संगठन संबंधी विषयों को उचित माध्यम से अध्यक्ष एवं सचिव के संज्ञान में लाना।
13. किसी सदस्य अथवा क्षेत्र से प्राप्त महत्वपूर्ण संगठनात्मक विषय को स्वयं अंतिम रूप से तय करने के बजाय आवश्यकतानुसार अध्यक्ष/सचिव के माध्यम से कार्यकारिणी के समक्ष रखना।
14. संस्था के सदस्यता अभियान, सदस्य विवरण एवं संगठनात्मक संपर्क व्यवस्था को व्यवस्थित रखने में सचिव एवं संबंधित पदाधिकारियों का सहयोग करना।
15. संस्था के विस्तार के लिए नए क्षेत्रों, नए सदस्यों एवं समाज के सक्रिय व्यक्तियों से संपर्क स्थापित करना।
16. संस्था के कार्यक्रमों की सूचना सदस्यों तक समय पर पहुँचाने तथा सहभागिता बढ़ाने में सहयोग करना।
17. कार्यकारिणी द्वारा गठित विभिन्न समितियों के साथ संगठनात्मक समन्वय स्थापित करना तथा उनके कार्यों की प्रगति की जानकारी संबंधित पदाधिकारियों से प्राप्त करना।
18. संस्था के कार्यक्रमों में स्वयं सक्रिय रहकर अन्य सदस्यों को भी सेवा एवं सहयोग के लिए प्रेरित करना।
19. संस्था की गरिमा, प्रतिष्ठा एवं संगठनात्मक अनुशासन के विरुद्ध किसी गतिविधि को प्रोत्साहित नहीं करना।
20. संगठन के अंदर मतभेद उत्पन्न होने की स्थिति में पक्षपात न करते हुए आपसी संवाद एवं समाधान का वातावरण बनाने में सहयोग करना।
21. संस्था के सदस्यों के बीच किसी भी प्रकार की अनावश्यक गुटबाजी, विवाद अथवा वैमनस्य को बढ़ावा नहीं देना।
22. संस्था की गोपनीय बैठकों, आंतरिक विचार-विमर्श एवं संवेदनशील संगठनात्मक जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना।
23. संस्था के नाम पर कोई महत्वपूर्ण सार्वजनिक घोषणा, वित्तीय प्रतिबद्धता, नियुक्ति, अनुबंध या नीतिगत निर्णय स्वयं से नहीं लेना; ऐसे विषय कार्यकारिणी की स्वीकृति के अधीन होंगे।
24. संगठन मंत्री को संस्था के संगठनात्मक कार्यों के लिए आवश्यक जानकारी एवं अभिलेख, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, सचिव अथवा संबंधित पदाधिकारी से प्राप्त करने का अधिकार होगा।
25. संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए नए संगठनात्मक सुझाव, योजनाएँ एवं प्रस्ताव कार्यकारिणी के समक्ष रखने का अधिकार होगा।
26. संगठन मंत्री संस्था की ओर से किसी व्यक्ति, संस्था या संगठन से आधिकारिक रूप से संपर्क कर सकता है, बशर्ते ऐसा संपर्क संस्था के अधिकृत निर्णय अथवा अध्यक्ष/सचिव की अनुमति के अनुरूप हो।
27. संस्था के कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों एवं कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करने तथा जिम्मेदारियाँ निर्धारित करने में अध्यक्ष एवं सचिव का सहयोग करना।
28. संगठन से संबंधित कार्यों की प्रगति की समय-समय पर अध्यक्ष एवं सचिव को जानकारी देना।
29. संगठन मंत्री संस्था की ओर से कोई आर्थिक व्यय तभी करेगा जब उसके लिए सक्षम प्राधिकारी/कार्यकारिणी द्वारा अनुमति या अधिकार प्रदान किया गया हो। बिना स्वीकृति के कोई वित्तीय दायित्व संस्था पर नहीं डाला जाएगा।
30. संगठन मंत्री संस्था के हित में प्राप्त होने वाले सुझावों एवं संगठनात्मक समस्याओं को उचित प्रक्रिया के माध्यम से कार्यकारिणी तक पहुँचाएगा तथा कार्यकारिणी के निर्णयों के क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग करेगा।
31. संगठन मंत्री अपने अधिकारों का प्रयोग संस्था के संविधान, पंजीकृत उपनियमों एवं कार्यकारिणी के वैध निर्णयों के अधीन करेगा।
32. संगठन मंत्री अपने कार्यों के लिए अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के प्रति उत्तरदायी होगा तथा समय-समय पर अपने कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
विशेष प्रावधान — संगठन मंत्री
संगठन मंत्री संस्था के संगठन विस्तार, सदस्य संपर्क, सक्रिय सहभागिता, एकता एवं अनुशासन का प्रमुख समन्वयक होगा। उसका मुख्य उद्देश्य संस्था को अधिक मजबूत, व्यवस्थित एवं सक्रिय बनाना होगा।
संगठन मंत्री को संगठनात्मक कार्यों में पहल करने, सदस्यों से संपर्क करने एवं सुझाव देने का पूर्ण अवसर रहेगा, किंतु संस्था की नीतिगत, वित्तीय, संपत्ति संबंधी अथवा महत्वपूर्ण प्रशासनिक शक्तियाँ केवल संविधान एवं कार्यकारिणी द्वारा निर्धारित अधिकारों के अनुसार ही प्रयोग की जाएँगी।
संगठन मंत्री द्वारा प्रस्तुत महत्वपूर्ण संगठनात्मक प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय कार्यकारिणी की स्वीकृति के अनुसार होगा। संगठन मंत्री कार्यकारिणी के वैध निर्णयों के क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग करेगा और संस्था की एकता, अनुशासन, प्रतिष्ठा तथा गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।
प्रचार मंत्री के अधिकार, कर्तव्य एवं जिम्मेदारियाँ
1. प्रचार मंत्री संस्था का प्रमुख प्रचार एवं जनसंपर्क पदाधिकारी होगा तथा संस्था के उद्देश्यों, गतिविधियों एवं उपलब्धियों को समाज तक पहुँचाने का कार्य करेगा।
2. संस्था के संविधान, उपनियमों एवं कार्यकारिणी के निर्णयों के अनुसार प्रचार संबंधी कार्य करना उसका प्रमुख कर्तव्य होगा।
3. संस्था द्वारा आयोजित शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं जनहितकारी कार्यक्रमों का उचित माध्यमों से प्रचार-प्रसार करना।
4. संस्था के कार्यक्रमों की सूचना सदस्यों एवं समाज तक समय पर पहुँचाने में सचिव एवं संगठन मंत्री के साथ समन्वय करना।
5. संस्था के कार्यक्रमों के लिए निमंत्रण पत्र, सूचना-पत्र, पोस्टर, बैनर, डिजिटल सामग्री एवं अन्य प्रचार सामग्री तैयार करवाने में सहयोग करना।
6. संस्था की गतिविधियों, उपलब्धियों एवं जनहितकारी कार्यों की सकारात्मक एवं तथ्यात्मक जानकारी समाज तक पहुँचाना।
7. समाचार पत्र, डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों में संस्था की गतिविधियों के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करना।
8. संस्था के कार्यक्रमों से संबंधित समाचार, फोटो, वीडियो एवं आवश्यक विवरण व्यवस्थित रूप से संकलित करना।
9. संस्था की महत्वपूर्ण गतिविधियों एवं उपलब्धियों का रिकॉर्ड तैयार रखने में सचिव का सहयोग करना।
10. संस्था की वेबसाइट, सोशल मीडिया पेज/ग्रुप एवं अन्य अधिकृत डिजिटल माध्यमों पर सामग्री के नियमित एवं व्यवस्थित प्रचार में सहयोग करना।
11. संस्था के नाम, लोगो, पदनाम एवं आधिकारिक पहचान का उपयोग केवल अधिकृत एवं संस्था के हित में करना।
12. प्रचार सामग्री में संस्था का नाम, उद्देश्य, कार्यक्रम की तिथि, स्थान एवं अन्य आवश्यक जानकारी सही एवं स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना।
13. किसी भी गलत, भ्रामक, अपुष्ट अथवा संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने वाली सूचना का प्रचार नहीं करना।
14. संस्था के अध्यक्ष, सचिव एवं कार्यकारिणी द्वारा अनुमोदित महत्वपूर्ण संदेशों को अधिकृत माध्यम से प्रसारित करना।
15. संस्था की ओर से प्रेस विज्ञप्ति अथवा सार्वजनिक बयान जारी करने से पूर्व आवश्यकतानुसार अध्यक्ष/सचिव की अनुमति प्राप्त करना।
16. संस्था की आंतरिक बैठकों, गोपनीय चर्चाओं, व्यक्तिगत विवादों, वित्तीय संवेदनशील जानकारी एवं गोपनीय दस्तावेजों को बिना अनुमति सार्वजनिक नहीं करना।
17. संस्था की गोपनीयता एवं प्रतिष्ठा की रक्षा करना प्रचार मंत्री की विशेष जिम्मेदारी होगी।
18. संस्था के कार्यक्रमों में मीडिया, पत्रकारों एवं अन्य अधिकृत प्रचार माध्यमों से समन्वय करना।
19. संस्था के प्रचार को किसी व्यक्ति विशेष के व्यक्तिगत प्रचार का माध्यम नहीं बनने देना।
20. संस्था के प्रचार में जातिगत, राजनीतिक, विवादास्पद अथवा संस्था के उद्देश्यों से असंबंधित सामग्री को बढ़ावा नहीं देना।
21. संस्था की एकता, भाईचारे, सामाजिक सद्भाव एवं सकारात्मक विचारों को बढ़ावा देने वाली सामग्री को प्राथमिकता देना।
22. संस्था के नए सदस्यों एवं समाज के लोगों को संस्था की गतिविधियों की जानकारी देकर संस्था से जोड़ने में संगठन मंत्री का सहयोग करना।
23. संस्था के कार्यक्रमों के प्रचार की योजना बनाकर आवश्यकतानुसार सचिव के माध्यम से कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्तुत करना।
24. प्रचार कार्य के लिए आवश्यक स्वयंसेवकों/टीम का गठन करने का प्रस्ताव कार्यकारिणी के समक्ष रखना तथा स्वीकृति के बाद उनका समन्वय करना।
25. संस्था के प्रचार संबंधी आवश्यक खर्च के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रस्ताव प्रस्तुत करना; बिना स्वीकृति के संस्था पर अनधिकृत आर्थिक दायित्व नहीं डालना।
26. संस्था के अधिकृत सोशल मीडिया ग्रुप/पेज पर अनुशासन एवं मर्यादा बनाए रखने में सहयोग करना।
27. सोशल मीडिया पर संस्था से संबंधित विवाद, आरोप-प्रत्यारोप अथवा आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक करने से बचना।
28. प्रचार संबंधी कार्यों की समय-समय पर अध्यक्ष एवं सचिव को जानकारी देना तथा आवश्यकतानुसार रिपोर्ट प्रस्तुत करना।
29. संस्था की उपलब्धियों, पुरस्कारों, सामाजिक सेवाओं एवं महत्वपूर्ण आयोजनों का व्यवस्थित प्रचार एवं अभिलेखीकरण करना।
30. प्रचार मंत्री संस्था के हित में प्रचार संबंधी नए सुझाव एवं योजनाएँ कार्यकारिणी के समक्ष रखने का अधिकार रखेगा।
31. प्रचार मंत्री द्वारा किए गए प्रचार कार्य संस्था के संविधान, उपनियमों एवं कार्यकारिणी के वैध निर्णयों के अनुरूप होंगे।
32. प्रचार मंत्री अपने कार्यों के लिए अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के प्रति उत्तरदायी होगा।
विशेष प्रावधान — प्रचार मंत्री
प्रचार मंत्री संस्था की प्रचार व्यवस्था, जनसंपर्क एवं सकारात्मक छवि निर्माण का प्रमुख समन्वयक होगा। संस्था की गतिविधियों को समाज तक प्रभावी, तथ्यात्मक, मर्यादित एवं सकारात्मक रूप में पहुँचाना उसकी मुख्य जिम्मेदारी होगी।
प्रचार मंत्री को प्रचार एवं जनसंपर्क के क्षेत्र में पहल करने तथा नई योजनाएँ प्रस्तुत करने का अधिकार होगा, परंतु संस्था की ओर से कोई नीतिगत, विवादास्पद, वित्तीय अथवा आधिकारिक घोषणा स्वयं से करने का अधिकार नहीं होगा। ऐसी घोषणा अध्यक्ष/सचिव अथवा कार्यकारिणी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही की जाएगी।
प्रचार मंत्री संस्था की गोपनीयता, गरिमा, एकता एवं प्रतिष्ठा की रक्षा करते हुए कार्य करेगा तथा संस्था के वैध निर्णयों के विरुद्ध कोई प्रचार अथवा सार्वजनिक वक्तव्य नहीं करेगा।
कार्यकारिणी सदस्य के अधिकार, कर्तव्य एवं जिम्मेदारियाँ
कार्यकारिणी सदस्य संस्था की कार्यकारिणी का अभिन्न अंग होगा तथा संस्था के उद्देश्यों, संविधान, उपनियमों एवं कार्यकारिणी द्वारा समय-समय पर लिए गए निर्णयों के अनुसार संस्था के कार्यों में सक्रिय एवं जिम्मेदार भूमिका निभाएगा।
1. कार्यकारिणी में सहभागिता
कार्यकारिणी सदस्य को कार्यकारिणी की बैठकों में उपस्थित होकर संस्था के विषयों पर चर्चा, विचार-विमर्श एवं सुझाव देने का अधिकार होगा।
2. निर्णय प्रक्रिया में अधिकार
कार्यकारिणी सदस्य को कार्यकारिणी के समक्ष रखे गए विषयों पर अपना मत रखने तथा नियमानुसार मतदान करने का अधिकार होगा।
3. संस्था के हित में सुझाव
सदस्य संस्था की प्रगति, संगठन विस्तार, सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं जनहित के कार्यों के संबंध में नए सुझाव एवं प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकेगा।
4. कार्य सौंपे जाने पर दायित्व
अध्यक्ष/सचिव अथवा कार्यकारिणी द्वारा सौंपे गए कार्य को निर्धारित समय में जिम्मेदारी एवं निष्ठा से पूरा करना कार्यकारिणी सदस्य का कर्तव्य होगा।
5. कार्यकारिणी के निर्णयों का पालन
कार्यकारिणी द्वारा संविधान एवं नियमों के अनुरूप सामूहिक रूप से लिए गए निर्णयों का सम्मान एवं पालन करना प्रत्येक कार्यकारिणी सदस्य की जिम्मेदारी होगी।
6. संस्था की एकता बनाए रखना
सदस्य संस्था में आपसी भाईचारा, सद्भाव, अनुशासन एवं एकता बनाए रखने का प्रयास करेगा तथा व्यक्तिगत मतभेदों को संस्था के कार्यों पर हावी नहीं होने देगा।
7. गोपनीयता बनाए रखना
संस्था की बैठकों में हुई गोपनीय चर्चा, आंतरिक निर्णय, वित्तीय अथवा प्रशासनिक जानकारी तथा ऐसी अन्य जानकारी जिसे कार्यकारिणी गोपनीय घोषित करे, उसे बिना अधिकृत अनुमति के सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
8. संस्था की प्रतिष्ठा
कार्यकारिणी सदस्य संस्था की प्रतिष्ठा, मर्यादा एवं विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए सदैव सजग रहेगा तथा ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा जिससे संस्था की छवि प्रभावित हो।
9. वित्तीय अनुशासन
सदस्य संस्था की धनराशि, संपत्ति अथवा संसाधनों का व्यक्तिगत उपयोग नहीं करेगा और संस्था से संबंधित किसी भी वित्तीय कार्य में पारदर्शिता एवं नियमों का पालन करेगा।
10. संस्था की संपत्ति की सुरक्षा
संस्था की चल-अचल संपत्ति, दस्तावेज, अभिलेख, सामग्री एवं अन्य संसाधनों की सुरक्षा में सहयोग करना सदस्य का दायित्व होगा।
11. कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता
संस्था द्वारा आयोजित बैठकों, सम्मेलनों, सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं जनहित के कार्यक्रमों में यथासंभव सक्रिय सहयोग एवं सहभागिता करना सदस्य की जिम्मेदारी होगी।
12. सदस्यता विस्तार
नए सदस्यों को संस्था से जोड़ने, संस्था के उद्देश्यों एवं नियमों की जानकारी देने तथा संगठन को मजबूत करने में सहयोग करेगा।
13. जनसंपर्क
समाज एवं आमजन के बीच संस्था के सकारात्मक कार्यों की जानकारी पहुंचाने तथा संस्था के प्रति विश्वास एवं सद्भाव बढ़ाने में सहयोग करेगा।
14. अभिलेख एवं सूचना
सदस्य को सौंपे गए कार्य से संबंधित आवश्यक जानकारी, रिपोर्ट, दस्तावेज एवं विवरण समय पर सचिव अथवा संबंधित पदाधिकारी को उपलब्ध कराना होगा।
15. अनुशासन
कार्यकारिणी सदस्य संस्था के संविधान, उपनियमों, आचार-संहिता तथा कार्यकारिणी के वैध निर्णयों का पालन करेगा।
16. पद का दुरुपयोग निषिद्ध
कोई भी कार्यकारिणी सदस्य अपने पद, नाम अथवा संस्था के प्रभाव का व्यक्तिगत लाभ, व्यापारिक लाभ अथवा किसी व्यक्ति विशेष के अनुचित लाभ के लिए उपयोग नहीं करेगा।
17. हितों का टकराव
यदि किसी विषय में सदस्य का व्यक्तिगत, पारिवारिक अथवा व्यावसायिक हित जुड़ा हो, तो वह इसकी जानकारी कार्यकारिणी को देगा तथा आवश्यक होने पर उस विषय के निर्णय में भाग लेने से स्वयं को अलग रखेगा।
18. शिकायत एवं सुझाव
संस्था से संबंधित किसी शिकायत, विवाद अथवा गंभीर समस्या की जानकारी मिलने पर उसे उचित माध्यम से अध्यक्ष/सचिव के समक्ष प्रस्तुत करेगा और स्वयं अनावश्यक विवाद उत्पन्न नहीं करेगा।
19. कार्यों की समीक्षा
सदस्य को संस्था के कार्यों की समीक्षा करने, कमियों की ओर ध्यान आकर्षित करने तथा सुधार के लिए रचनात्मक सुझाव देने का अधिकार होगा।
20. सामूहिक उत्तरदायित्व
कार्यकारिणी के सामूहिक निर्णयों के लिए प्रत्येक सदस्य अपनी निर्धारित भूमिका के अनुसार उत्तरदायी होगा। व्यक्तिगत रूप से किए गए अनधिकृत कार्य के लिए संबंधित सदस्य स्वयं जिम्मेदार होगा।
21. बैठक में उपस्थिति
कार्यकारिणी सदस्य को नियमित रूप से बैठकों में उपस्थित रहना चाहिए। बिना उचित कारण लगातार बैठकों से अनुपस्थित रहने पर कार्यकारिणी नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई कर सकेगी।
22. संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति
सदस्य संस्था के मूल उद्देश्यों की पूर्ति के लिए समय, श्रम, अनुभव एवं क्षमता के अनुसार सहयोग करेगा।
23. अधिकारों की सीमा
कार्यकारिणी सदस्य अपने पद के आधार पर अकेले संस्था की ओर से कोई बड़ा वित्तीय, कानूनी, प्रशासनिक अथवा नीतिगत निर्णय लेने के लिए अधिकृत नहीं होगा, जब तक कि उसे कार्यकारिणी अथवा सक्षम पदाधिकारी द्वारा विधिवत अधिकार न दिया गया हो।
24. प्रतिनिधित्व
कार्यकारिणी द्वारा अधिकृत किए जाने पर सदस्य संस्था का प्रतिनिधित्व कर सकेगा तथा संस्था की ओर से दिए गए दायित्व का निर्वहन करेगा।
25. निर्णय में पारदर्शिता
कार्यकारिणी सदस्य किसी निर्णय को व्यक्तिगत लाभ, पक्षपात, दबाव या निजी संबंधों से प्रभावित नहीं करेगा तथा संस्था के व्यापक हित को प्राथमिकता देगा।
26. संस्था के प्रति निष्ठा
कार्यकारिणी सदस्य संस्था के प्रति निष्ठावान रहते हुए उसके उद्देश्यों, प्रतिष्ठा एवं हितों की रक्षा करेगा।
27. पद की मर्यादा
सदस्य अपने पद की गरिमा एवं मर्यादा बनाए रखेगा और अन्य पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करेगा।
28. कार्यों में समन्वय
अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, संगठन मंत्री, प्रचार मंत्री एवं अन्य पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर संस्था के कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में सहयोग करेगा।
29. आपातकालीन परिस्थिति
संस्था के हित में किसी आकस्मिक परिस्थिति में सदस्य तत्काल संबंधित पदाधिकारी को सूचना देगा तथा आवश्यक सहयोग करेगा। बिना अधिकार के स्वयं कोई बाध्यकारी निर्णय नहीं लेगा।
30. पद से हटाने/निलंबन का आधार
यदि कोई कार्यकारिणी सदस्य लगातार कर्तव्यों की उपेक्षा करता है, संस्था के नियमों का उल्लंघन करता है, गोपनीय जानकारी का अनधिकृत खुलासा करता है, संस्था की प्रतिष्ठा को जानबूझकर नुकसान पहुंचाता है अथवा पद का दुरुपयोग करता है, तो संविधान एवं उपनियमों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।
31. कार्यकारिणी की सर्वोच्चता
कार्यकारिणी सदस्य व्यक्तिगत रूप से संस्था की कार्यकारिणी से ऊपर नहीं होगा। संस्था के सामूहिक एवं विधिसम्मत निर्णयों को प्राथमिकता दी जाएगी।
32. संशोधन एवं व्याख्या
इन प्रावधानों की व्याख्या संस्था के संविधान एवं उपनियमों के अनुरूप की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर कार्यकारिणी संस्था के हित में इन प्रावधानों में संशोधन/स्पष्टीकरण का प्रस्ताव तैयार कर सकती है, जिसे निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार अनुमोदित किया जाएगा।
33. मूल सिद्धांत
प्रत्येक कार्यकारिणी सदस्य का मूल दायित्व होगा कि वह “पद को अधिकार नहीं, बल्कि संस्था एवं समाज की सेवा का दायित्व” मानकर कार्य करे।
निष्कर्ष:
कार्यकारिणी सदस्य संस्था की सामूहिक निर्णय प्रणाली का महत्वपूर्ण अंग होगा। वह संस्था की एकता, अनुशासन, पारदर्शिता, गोपनीयता, प्रतिष्ठा एवं विकास के प्रति पूर्णतः उत्तरदायी रहेगा तथा संस्था के हित को व्यक्तिगत हित से सदैव ऊपर रखेगा।
संस्था की आय के निम्नलिखित प्रमुख साधन होंगे—
(A) वार्षिक शुल्क एवं अधिभार:
संस्था के सदस्यों से संविधान एवं उपनियमों के अनुसार निर्धारित वार्षिक शुल्क, विशेष शुल्क, अधिभार अथवा अन्य अनुमोदित शुल्क प्राप्त किया जा सकेगा।
(B) प्रवेश शुल्क:
नवीन सदस्य बनाए जाने के समय संस्था द्वारा निर्धारित प्रवेश शुल्क प्राप्त किया जाएगा। प्रवेश शुल्क की राशि कार्यकारिणी समिति द्वारा निर्धारित/संशोधित की जा सकेगी, बशर्ते वह संस्था के संविधान एवं लागू कानून के अनुरूप हो।
(C) अनुदान एवं सहायता:
केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय, शैक्षणिक/सामाजिक संस्थाओं, दानदाताओं, अन्य वैधानिक संस्थाओं अथवा किसी अन्य वैध स्रोत से प्राप्त अनुदान, सहायता एवं आर्थिक सहयोग संस्था की आय का साधन होगा।
(D) विज्ञापन एवं अन्य वैध साधन:
संस्था द्वारा प्रकाशित स्मारिका, डायरेक्टरी, पत्रिका, वेबसाइट, डिजिटल माध्यम, कार्यक्रमों अथवा अन्य अधिकृत गतिविधियों में प्राप्त विज्ञापन राशि तथा अन्य सभी वैध स्रोतों से प्राप्त आय संस्था की आय मानी जाएगी।
(E) दान एवं सहयोग राशि:
संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु प्राप्त स्वैच्छिक दान, सहयोग राशि, चढ़ावा अथवा अन्य वैध आर्थिक सहायता संस्था की आय में सम्मिलित की जा सकेगी।
(F) अन्य वैध आय:
संस्था द्वारा संविधान एवं लागू कानून के अनुरूप किए गए अन्य कार्यों अथवा गतिविधियों से प्राप्त वैध आय भी संस्था की आय का हिस्सा होगी।
आय के उपयोग संबंधी प्रावधान
(1) संस्था की समस्त आय, निधि एवं संपत्ति का उपयोग केवल संस्था के घोषित उद्देश्यों, शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं जनहितकारी कार्यों तथा प्रशासनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जाएगा।
(2) संस्था की आय अथवा संपत्ति का किसी पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य या सदस्य को व्यक्तिगत लाभ, निजी उपयोग अथवा लाभांश के रूप में वितरण नहीं किया जाएगा।
(3) संस्था की आय का उपयोग पारदर्शी एवं निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा तथा आय-व्यय का उचित लेखा-जोखा रखा जाएगा।
(4) संस्था की किसी भी आय अथवा संपत्ति का उपयोग ऐसा नहीं किया जाएगा जिससे संस्था के मूल उद्देश्यों, पंजीकृत स्वरूप अथवा लागू कानून का उल्लंघन हो।
(5) संस्था की समस्त आय एवं संपत्ति संस्था की सामूहिक संपत्ति होगी तथा किसी व्यक्ति को संस्था की आय या संपत्ति पर व्यक्तिगत स्वामित्व का अधिकार नहीं होगा।
(6) संस्था के कार्यों एवं उद्देश्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए प्राप्त आय में से आवश्यक राशि संस्था की भविष्य की गतिविधियों एवं आकस्मिक आवश्यकताओं हेतु सुरक्षित/आरक्षित रखी जा सकेगी।
(7) आय के प्रत्येक स्रोत एवं उसके उपयोग का विवरण संस्था के लेखा अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसका लेखा-परीक्षण कराया जाएगा।
पद रिक्त होने एवं रिक्त पद की पूर्ति
1. किसी भी पदाधिकारी अथवा कार्यकारिणी समिति के सदस्य द्वारा त्यागपत्र देने, निधन होने, पद से हटाए जाने, सदस्यता समाप्त होने अथवा किसी अन्य कारण से पद रिक्त होने की स्थिति में, उस रिक्त पद की पूर्ति कार्यकारिणी समिति द्वारा एक माह के भीतर की जाएगी।
2. रिक्त पद की पूर्ति कार्यकारिणी समिति द्वारा संस्था के हित, कार्य की निरंतरता एवं प्रशासनिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, योग्य सदस्य में से की जाएगी तथा इस संबंध में कार्यकारिणी समिति का निर्णय मान्य एवं प्रभावी होगा।
3. इस प्रकार कार्यकारिणी समिति द्वारा मनोनीत/चयनित पदाधिकारी अथवा कार्यकारिणी सदस्य का कार्यकाल अगले नियमित चुनाव तक रहेगा। उसके बाद होने वाले चुनाव में वह पद पुनः निर्वाचन के अधीन होगा।
4. रिक्त पद की पूर्ति होने तक कार्यकारिणी समिति संस्था के कार्यों में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो, इसके लिए आवश्यकतानुसार उक्त पद का कार्य किसी अन्य पदाधिकारी/सदस्य को अस्थायी रूप से सौंप सकती है।
5. रिक्त पद की पूर्ति के संबंध में कार्यकारिणी समिति द्वारा लिया गया निर्णय संस्था के संविधान एवं उपनियमों के अधीन अंतिम एवं बाध्यकारी होगा।
अध्याय — चुनाव प्रणाली
1. चुनाव में भाग लेने की पात्रता
संस्था के चुनाव में केवल वही व्यक्ति भाग ले सकेगा जो संस्था का वैध, सक्रिय एवं पात्र सदस्य हो तथा संविधान एवं उपनियमों में निर्धारित सभी शर्तों को पूरा करता हो।
2. कार्यकारिणी सदस्य पद की पात्रता
कार्यकारिणी सदस्य पद के लिए वही व्यक्ति चुनाव लड़ सकेगा जो संस्था का कम से कम 5 वर्ष पुराना एवं सक्रिय सदस्य हो।
3. पदाधिकारी पद की पात्रता
अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, संगठन मंत्री, प्रचार मंत्री अथवा अन्य पदाधिकारी पद के लिए वही व्यक्ति चुनाव लड़ सकेगा जो वर्तमान में अथवा पूर्व में संस्था की कार्यकारिणी समिति का सदस्य या पदाधिकारी रह चुका हो।
4. नामांकन फार्म शुल्क
प्रत्येक चुनावी नामांकन फार्म का शुल्क ₹100/- होगा, जो फार्म जमा करते समय अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। यह राशि किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं होगी।
5. कार्यकारिणी सदस्य हेतु जमानत राशि
कार्यकारिणी सदस्य पद के प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन फार्म के साथ ₹4,100/- जमानत/अग्रिम राशि जमा करनी होगी।
6. पदाधिकारी हेतु जमानत राशि
पदाधिकारी पद के प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन फार्म के साथ ₹5,100/- जमानत/अग्रिम राशि जमा करनी होगी।
7. राशि की वापसी नहीं
नामांकन फार्म शुल्क एवं जमा की गई जमानत/अग्रिम राशि किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं की जाएगी, चाहे उम्मीदवार चुनाव जीते, हारे, निर्विरोध निर्वाचित हो, नाम वापस ले, चुनाव न लड़े अथवा उसका नामांकन निरस्त हो जाए।
8. चुनाव आयुक्त समिति
संस्था की कार्यकारिणी समिति द्वारा दो सदस्यीय चुनाव आयुक्त समिति का गठन किया जाएगा। चुनाव आयुक्त समिति का गठन संभावित चुनाव तिथि से कम से कम 60 दिन पूर्व किया जाएगा तथा समिति का कार्यकाल 3 वर्ष का होगा।
9. चुनाव की प्रथम प्राथमिकता
चुनाव आयुक्त समिति का प्रथम प्रयास रहेगा कि संस्था की एकता, भाईचारे एवं संगठनात्मक हित को ध्यान में रखते हुए चुनाव सर्वसम्मति से सम्पन्न हो।
10. निर्विरोध चुनाव
यदि किसी पद के लिए योग्य उम्मीदवारों के बीच सर्वसम्मति से केवल एक उम्मीदवार का चयन हो जाता है, तो चुनाव आयुक्त समिति उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर सकेगी।
11. मतदान द्वारा चुनाव
यदि सर्वसम्मति नहीं बनती है और किसी पद के लिए एक से अधिक योग्य उम्मीदवार रहते हैं, तो उस पद का चुनाव लोकतांत्रिक मतदान द्वारा कराया जाएगा।
12. मतदान की पद्धति
मतदान सामान्यतः गुप्त मतदान द्वारा कराया जाएगा। चुनाव आयुक्त समिति मतदान की सुरक्षित, निष्पक्ष एवं पारदर्शी व्यवस्था निर्धारित करेगी।
13. मतगणना एवं परिणाम
मतदान समाप्त होने के बाद चुनाव आयुक्त समिति द्वारा मतगणना की जाएगी। जिस उम्मीदवार को संबंधित पद के लिए सर्वाधिक वैध मत प्राप्त होंगे, उसे निर्वाचित घोषित किया जाएगा।
14. बराबर मत आने पर
यदि दो या अधिक उम्मीदवारों को समान सर्वाधिक मत प्राप्त होते हैं, तो संबंधित उम्मीदवारों की उपस्थिति में पर्ची द्वारा चयन किया जाएगा। चुनाव आयुक्त समिति द्वारा निर्धारित यह प्रक्रिया चुनाव के आंतरिक स्तर पर अंतिम मानी जाएगी, बशर्ते इसमें कोई स्पष्ट अनियमितता या नियम-विरुद्ध कार्य न हुआ हो।
15. चुनाव आयुक्त समिति के सहयोगी
चुनाव आयुक्त समिति चुनाव कार्य में सहयोग के लिए अधिकतम दो सहयोगियों की नियुक्ति कर सकेगी। ये सहयोगी वर्तमान कार्यकारिणी के सदस्य नहीं होंगे।
16. चुनाव आयुक्त एवं सहयोगियों की निष्पक्षता
चुनाव आयुक्त समिति एवं उनके सहयोगी स्वयं संस्था के किसी पद अथवा कार्यकारिणी सदस्य पद के उम्मीदवार नहीं बन सकेंगे। यदि वे संस्था के वैध मतदाता हैं, तो उन्हें अपने मताधिकार का प्रयोग करने का पूर्ण अधिकार होगा।
17. चुनाव कार्यक्रम
कार्यकारिणी समिति चुनाव की संभावित तिथि एवं आवश्यक कार्यक्रम निर्धारित कर चुनाव आयुक्त समिति को उपलब्ध कराएगी। चुनाव आयुक्त समिति नामांकन, जांच, आपत्ति, नाम वापसी, अंतिम उम्मीदवार सूची, मतदान, मतगणना एवं परिणाम घोषणा की प्रक्रिया संचालित करेगी।
18. चुनाव में अनुशासन
चुनाव के दौरान किसी भी उम्मीदवार या सदस्य द्वारा धमकी, दबाव, धनबल, व्यक्तिगत अपमान, अनुचित प्रभाव अथवा संस्था की एकता एवं प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधि करना निषिद्ध होगा।
19. चुनाव संबंधी विवाद
चुनाव परिणाम अथवा चुनाव प्रक्रिया के संबंध में कोई उम्मीदवार आपत्ति करना चाहता है तो उसे परिणाम घोषित होने के 5 दिवस के भीतर चुनाव आयुक्त समिति के समक्ष लिखित अपील प्रस्तुत करनी होगी।
20. संस्था की एकता सर्वोपरि
चुनाव का उद्देश्य संस्था में गुटबाजी अथवा विवाद उत्पन्न करना नहीं, बल्कि योग्य एवं सक्षम कार्यकारिणी का गठन करना होगा। प्रत्येक उम्मीदवार एवं सदस्य संस्था की गरिमा, एकता एवं भाईचारे को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।
21. मूल चुनाव सिद्धांत
“सर्वसम्मति प्रथम विकल्प,
सर्वसम्मति न होने पर लोकतांत्रिक मतदान,
निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया,
और हर परिस्थिति में संस्था की एकता एवं हित सर्वोपरि।”
(A) सूचना का माध्यम:
संस्था की समस्त महत्वपूर्ण सूचनाएँ, बैठकें, अधिवेशन, कार्यक्रम, चुनाव संबंधी सूचना तथा अन्य आवश्यक जानकारी संस्था के अधिकृत WhatsApp Group में जारी की जाएगी। WhatsApp Group में जारी की गई सूचना को संस्था की आंतरिक सूचना के रूप में मान्य माना जाएगा।
(B) साधारण सभा एवं वार्षिक अधिवेशन की सूचना:
साधारण सभा तथा वार्षिक अधिवेशन की सूचना निर्धारित तिथि से कम से कम 5 (पाँच) दिन पूर्व संस्था के सदस्यों को दी जाएगी।
(C) कार्यकारिणी समिति की बैठक की सूचना:
कार्यकारिणी समिति की सामान्य बैठक की सूचना बैठक की निर्धारित तिथि से कम से कम 2 (दो) दिन पूर्व दी जाएगी।
(D) आपातकालीन कार्यकारिणी बैठक:
किसी अत्यावश्यक, आकस्मिक अथवा संस्था के हित में तत्काल निर्णय लिया जाना आवश्यक होने पर कार्यकारिणी समिति की आपात बैठक की सूचना कम से कम 2 (दो) घंटे पूर्व भी WhatsApp Group के माध्यम से दी जा सकेगी। ऐसी बैठक में मुख्यतः तत्काल एवं आवश्यक विषयों पर ही विचार एवं निर्णय किया जाएगा।
(E) सूचना जारी करने का अधिकार:
संस्था की ओर से आधिकारिक सूचना अध्यक्ष, सचिव अथवा कार्यकारिणी समिति द्वारा अधिकृत पदाधिकारी द्वारा जारी की जा सकेगी।
(F) सूचना में विवरण:
बैठक अथवा अधिवेशन की सूचना में यथासंभव तिथि, समय, स्थान तथा कार्यसूची (एजेंडा) का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।
(G) सदस्यों की जिम्मेदारी:
प्रत्येक सदस्य का दायित्व होगा कि वह संस्था के अधिकृत WhatsApp Group में उपलब्ध कराई गई सूचनाओं को समय-समय पर देखता रहे। केवल सूचना नहीं देखने अथवा WhatsApp Group में सक्रिय न रहने के आधार पर सूचना प्राप्त न होने का दावा सामान्यतः स्वीकार्य नहीं होगा, बशर्ते सूचना विधिवत अधिकृत माध्यम से जारी की गई हो।
(H) गोपनीय सूचना:
संस्था की आंतरिक, गोपनीय अथवा संवेदनशील जानकारी को बिना अधिकृत अनुमति के किसी बाहरी व्यक्ति, संस्था, सोशल मीडिया अथवा अन्य सार्वजनिक माध्यम पर प्रसारित नहीं किया जाएगा।
(I) सार्वजनिक सूचना:
संस्था की ओर से प्रेस विज्ञप्ति, सार्वजनिक बयान अथवा आधिकारिक घोषणा केवल अध्यक्ष, सचिव अथवा कार्यकारिणी समिति द्वारा अधिकृत व्यक्ति ही जारी करेगा।
(J) सूचना का अभिलेख:
महत्वपूर्ण सूचनाओं का डिजिटल रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट अथवा अन्य आवश्यक अभिलेख संस्था द्वारा सुरक्षित रखा जा सकेगा, ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर सूचना जारी किए जाने का प्रमाण उपलब्ध रहे।
(K) विशेष परिस्थितियाँ:
प्राकृतिक आपदा, आकस्मिक घटना, प्रशासनिक आवश्यकता या संस्था के हित में तत्काल निर्णय की आवश्यकता होने पर कार्यकारिणी समिति परिस्थितिनुसार आवश्यक सूचना एवं बैठक की प्रक्रिया निर्धारित कर सकेगी।
(L) कार्यकारिणी समिति का अधिकार:
सूचना जारी करने के माध्यम, प्रक्रिया एवं व्यवस्था के संबंध में कार्यकारिणी समिति आवश्यक दिशा-निर्देश निर्धारित कर सकेगी। ऐसे दिशा-निर्देश संस्था के संविधान, उपनियम एवं लागू कानून के अनुरूप होंगे।
(M) सूचना की वैधता:
संस्था के अधिकृत माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी की गई सूचना संस्था की आधिकारिक सूचना मानी जाएगी और उसके आधार पर की गई वैधानिक कार्यवाही को केवल सूचना के माध्यम के संबंध में अनावश्यक विवाद के आधार पर निरस्त नहीं किया जाएगा।
उत्सव एवं सभाएँ
1. संस्था द्वारा सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं जनहित से संबंधित उत्सव, समारोह, सम्मेलन, संगोष्ठी तथा अन्य कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जा सकेंगे।
2. संस्था के प्रमुख उत्सव एवं वार्षिक कार्यक्रमों का आयोजन कार्यकारिणी समिति की स्वीकृति एवं निर्णय के अनुसार किया जाएगा।
3. किसी भी उत्सव, समारोह अथवा कार्यक्रम की तिथि, स्थान, स्वरूप, बजट एवं आयोजन व्यवस्था का निर्धारण कार्यकारिणी समिति द्वारा किया जाएगा।
4. संस्था की साधारण सभा एवं वार्षिक अधिवेशन की सूचना कम से कम 5 दिन पूर्व संस्था के अधिकृत व्हाट्सऐप ग्रुप अथवा अन्य निर्धारित माध्यम से दी जाएगी।
5. कार्यकारिणी समिति की सामान्य बैठक की सूचना कम से कम 2 दिन पूर्व दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर कार्यकारिणी की आपात बैठक की सूचना कम से कम 2 घंटे पूर्व भी दी जा सकेगी।
6. संस्था के सभी पदाधिकारी एवं सदस्य उत्सवों एवं सभाओं में अनुशासन, मर्यादा एवं आपसी सम्मान बनाए रखते हुए संस्था के उद्देश्यों के अनुरूप सहयोग करेंगे।
7. किसी भी सभा या कार्यक्रम में लिए गए निर्णयों का कार्यान्वयन कार्यकारिणी समिति द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
8. उत्सव एवं सभाओं से संबंधित आय-व्यय का उचित लेखा-जोखा रखा जाएगा तथा संस्था के वित्तीय नियमों के अनुसार उसका अभिलेख सुरक्षित रखा जाएगा।
9. किसी कार्यक्रम के आयोजन में विवाद, मतभेद अथवा प्रशासनिक कठिनाई उत्पन्न होने पर कार्यकारिणी समिति संस्था के हित में आवश्यक निर्णय लेने के लिए अधिकृत होगी।
10. संस्था आवश्यकता एवं परिस्थितियों के अनुसार किसी भी उत्सव, सभा या कार्यक्रम की तिथि, स्थान अथवा आयोजन व्यवस्था में परिवर्तन, स्थगन या निरस्तीकरण कर सकती है।
(1) आयोजन:
संस्था का वार्षिक अधिवेशन प्रत्येक वर्ष संस्था के निर्धारित नियमों एवं कार्ययोजना के अनुसार आयोजित किया जाएगा। वार्षिक अधिवेशन संस्था का महत्वपूर्ण वार्षिक मंच होगा, जिसमें संस्था के कार्यों, उपलब्धियों, आय-व्यय एवं आगामी योजनाओं पर विचार किया जाएगा।
(2) सूचना:
वार्षिक अधिवेशन की सूचना निर्धारित तिथि से कम से कम 5 (पाँच) दिन पूर्व संस्था के अधिकृत WhatsApp Group में जारी की जाएगी।
(3) कार्यसूची:
वार्षिक अधिवेशन की कार्यसूची में संस्था की वार्षिक गतिविधियों की समीक्षा, आय-व्यय का विवरण, लेखा-जोखा, आगामी कार्ययोजना, सदस्यता संबंधी विषय तथा संस्था के उद्देश्यों से संबंधित अन्य आवश्यक विषय शामिल किए जा सकेंगे।
(4) अध्यक्षता:
वार्षिक अधिवेशन की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष द्वारा की जाएगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में नियमानुसार अधिकृत/कार्यवाहक पदाधिकारी अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा।
(5) उपस्थिति:
संस्था के पात्र एवं सक्रिय सदस्यों को वार्षिक अधिवेशन में भाग लेने का अधिकार होगा तथा प्रत्येक सदस्य संस्था के हित में अपने सुझाव एवं विचार प्रस्तुत कर सकेगा।
(6) निर्णय:
वार्षिक अधिवेशन में लिए गए निर्णय संस्था के संविधान, उपनियम एवं लागू कानून के अधीन होंगे। कार्यकारिणी समिति के वैधानिक अधिकार एवं शक्तियाँ इस अधिवेशन के कारण कम या समाप्त नहीं होंगी।
(7) कार्यवाही:
वार्षिक अधिवेशन की कार्यवाही का लिखित विवरण तैयार किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार अध्यक्ष एवं सचिव द्वारा प्रमाणित कर संस्था के अभिलेख में सुरक्षित रखा जाएगा।
(8) संस्था का हित सर्वोपरि:
वार्षिक अधिवेशन में सभी सदस्यों से संस्था की एकता, अनुशासन, पारदर्शिता एवं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सहयोग की अपेक्षा की जाएगी। व्यक्तिगत विवाद अथवा व्यक्तिगत हित के स्थान पर संस्था का हित सर्वोपरि माना जाएगा।
(9) विशेष विषय:
कार्यकारिणी समिति संस्था के हित में आवश्यक समझे जाने वाले अतिरिक्त विषयों को वार्षिक अधिवेशन की कार्यसूची में सम्मिलित कर सकेगी।
(10) विशेष परिस्थिति:
किसी अपरिहार्य परिस्थिति में वार्षिक अधिवेशन की तिथि में परिवर्तन करने का अधिकार कार्यकारिणी समिति को होगा, जिसकी सूचना सदस्यों को अधिकृत WhatsApp Group के माध्यम से दी जाएगी।
साधारण सभा के नियम
(1) साधारण सभा संस्था की सर्वोच्च इकाई होगी इसके निर्णय सर्व मान्य होगे
(2) संस्था के नियम सर्वोपरि होगे सभी सदस्यों के लिए उनका पालन अनिवार्य होगा
(3) सभा मै केवल वैध सदस्य को ही भाग लेने व बोलने का अधिकार होगा
(4) सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पूर्ण अधिकार होगा
(5) सभी सदस्यों के सवालों का जबाव संबधित पदाधिकारियों द्वारा दिया जाना अनिवार्य होगा
(6) कोई भी सदस्य अध्यक्ष की अनुमति के बिना नही बोलेगा
(7) सभी सदस्य अपनी बारी मे ही अपने विचार प्रस्तुत करेगा
(8) सभी सदस्य अपनी - अपनी बारी का धैर्यपूर्वक इंतजार करेगा
(9) किसी भी सदस्य के बोलते समय बीच मे हस्तक्षेप करना पूर्णतः निषिध्द होगा
(10) सभा मै पूर्ण अनुशासन, शांति, एव व्यवस्था बनाए रखना अनिवार्य होगा
(11) सभी सदस्य मर्यादित, शालीन, एव सम्मानजनक, भाषा, का प्रयोग करेगें
(12) किसी भी प्रकार की कटु अपमानजनक या उसकाने वाली भाषा पूर्णत वर्जित होगी
(13) अध्यक्ष के निर्देशों का पालन करना प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य होगा
(14) सभा मै अनावश्यक बहस, शोर - शराबा या अव्यवस्था उत्पन्न करना दंडनीय होगा
(15) सभा के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग केवल आवश्यक कार्य हेतु सीमित रखा जाएगा
(16) किसी भी विषय पर बोलते समय सदस्य को विषय तक सीमित रहना अनिवार्य होगा
(17) व्यक्तिगत आरोप - प्रत्यारोप एव निजी टिप्पणीया पूर्णत प्रतिबंधित होगी
(18) सभा का निर्णय बहुमत से लिए जाएगे ओर बहुमत का निर्णय सभी सदस्यों को स्वीकार्य होगे
(19) सभा की कार्यवाही ( minutes book ) का सम्मान करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य होगा
(20) यदि कोई समाज बंधु ( गैर सदस्य ) सभा मै उपस्थित होता है तो उसे संस्था के नियमों की जानकारी केवर अध्यक्ष या सचिव द्वारा ही दी जाएगी अन्य सदस्य नही देगे
(21) साधारण सभा मै पधारे सभी समाज बंधुओ का सम्मान करना प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी होगी
(22) नियमों का उल्लंघन करने वाले सदस्य के विरूद्ध चेतावनी या कार्यवाही की जा सकती है
(23) गंभीर अनुशासनहीनता की स्थिति मै सदस्य का बोलने का अधिकार या सदस्य निलंबित की जा सकती है
(24) अध्यक्ष का निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी होगा
Member Fee
एक बार
Annual Fee
प्रति वर्ष